प्रदेश सरकार ने ई कॉमर्स कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें समाधान योजना का लाभ दे दिया है। इस योजना के तहत ई कॉमर्स कारोबारियों को अपने कारोबार का महज एक फीसदी टैक्स देना होगा। ये फैसला ई कामर्स प्लेटफार्म से जुड़े व्यापारियों को राहत देने और डिजिटल प्लेटफार्म से ज्यादा से ज्यादा व्यापारियों को जोड़ने के लिए किया गया है। अभी तक ई कॉमर्स व्यापारियों को समाधान का लाभ नहीं मिलता था। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
अभी तक ई कॉमर्स कारोबारियों को माल और सेवा में अलग-अलग टैक्स देना पड़ता था, जिसमें तमाम जटिलताओं का सामना व्यापारी कर रहे थे। दरअसल केन्द्र सरकार ने पहले ही ई कॉमर्स कारोबारियों को इस तरह की राहत दी थी, जिसे राज्य सरकार ने भी स्वीकार कर लिया। राज्य के बाहर भी ई कॉमर्स से कारोबार करने वाले कारोबारियों को इसका लाभ मिलेगा। इस कदम से जीएसटी का बोझ बेहद कम पड़ेगा और अपने माल को देश में कहीं भी बेचने के लिए डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल करने को बढ़ावा मिलेगा। एक फीसदी टैक्स देने के बाद कारोबारियों को रिटर्न भरने से छूट मिलेगी लेकिन इनपुट टैैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ नहीं मिलेगा।
जीएसटी में कम्पाउंडिंग व्यवस्था में भी बदलाव को मंजूरी दे दी गई है। नई व्यवस्था में व्यापारियों को टैक्स में आधा फीसदी का फायदा होगा। जीएसटी से जुड़े विवादों के निस्तारण के लिए राज्य ट्रिब्यूनल के गठन को भी मंजूरी दे दी गई है। जीएसटी में इसकी व्यवस्था पहले से है लेकिन अब नए सिरे से इसका गठन किया जाएगा, जिसका नाम अब राज्य ट्रिब्यूनल पीठ होगा।
रास्ता साफ, अब 22 वर्ष की सेवा पूरी करने पर बन सकेंगे मुख्य अभियंता
सिंचाई विभाग में अब 22 वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने पर अधीक्षण अभियंता से मुख्य अभियंता के पद पर पदोन्नति हो सकेगी। पहले यह अवधि 25 वर्ष थी। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में उप्र अभियंता सेवा (सिंचाई विभाग, समूह क) में छठवें संशोधन को मंजूरी दे दी गई। दरअसल अधीक्षण अभियंता से मुख्य अभियंता स्तर -2 के पद पर केवल उन्हीं की पदोन्नति हो सकती थी जिन्होंने अपनी भर्ती के दिन से 25 वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली हो। इसमें भी कम से कम एक वर्ष अधीक्षण अभियंता के रूप में काम कर लिया हो। इस नियम से भारी परेशानी खड़ी हो रही थी। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के मुताबिक मुख्य अभियंता सिविल (स्तर-2) के स्वीकृत 37 पदों के सापेक्ष 19 मुख्य अभियंता कार्यरत हैं एवं 18 पद रिक्त हैं। एक जुलाई 2025 को सभी पद रिक्त हो जाएंगे। 25 वर्ष की बाध्यता के कारण पिछले पांच साल से भी अधिक समय से अधीक्षण पद पर कार्यरत अधिकारी भी इस पात्रता में नहीं आ पा रहे हैं। इसी तरह यांत्रिक संवर्ग में भी मुख्य अभियंता (स्तर-2), मुख्य अभियंता (स्तर-1) एवं प्रमुख अभियंता (यांत्रिक) के पद पर एक अगस्त 2024 तक कोई भी अधिकारी उपलब्ध नहीं हो सकेगा। ऐसे में इस नियम में संशोधन जरूरी था। इसके लिए निर्धारित अर्हकारी सेवा 25 वर्ष को घटाते हुए 22 वर्ष करने संबंधी संशोधन नियमावली को प्रख्यापित करने का प्रस्ताव रखा गया जिसे कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी।
जल निगम के 267 कर्मचारी नगर निकायों में होंगे समायोजित
जल निगम (शहरी) की वित्तीय स्थिति खराब होने की वजह से सरकार ने फील्ड में तैनात समूह 'घ' (चतुर्थ श्रेणी) के 267 कर्मचारियों को नगर निकायों में रिक्त पदों पर समायोजित करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है । इन कर्मचारियों का समायोजन बॉडी शापिंग के आधार किया जाएगा । पिछले साल भी जल निगम के 1238 कर्मचारियों को नगर निकायो में समायोजित किया गया था।
दरअसल मौजूदा समय में जल निगम (शहरी) की वित्तीय स्थिति काफी खराब है । इस वजह से यहां के कर्मचारियों को पिछले चार महीने से वेतन, भत्ते व पेंशन का भुगतान नहीं हो पा रहा है। वहीं, जल निगम पर कर्मचारियों की देयकों का भार लगातार बढ़ता जा रहा है । इसके मद्दनेजर सरकार ने फील्ड में तैनात समहू 'घ' के कर्मचारियों को सरप्लस मानते हुए नगर निकायों में रिक्त पदों पर बॉडी शापिंग के आधार पर तैनात करने का निर्णय लिया है ।
एक प्रकार की प्रतिनियुक्ति है बॉडी शापिंग
बॉडी शापिंग एक प्रकार की प्रतिनियुक्ति है। इस व्यवस्था के अनुसार जल निगम के कर्मचारियों की नियुक्ति भले ही नगर निकायों में होगी, लेकिन उनके वेतन और देयकों का भुगतान निकायों द्वारा कर्मचारियों को न करके जल निगम को किया जाएगा । जल निगम प्रशासन द्वारा संबंधित कर्मचारी के खाते में वेतन आदि का भुगतान किया जाएगा। इसी प्रकार निकायों में नियुक्त जल निगम कर्मियों की सेवानिवृत्ति के बाद के देयकों का भी भुगतान नियोक्ता यानि जल निगम को ही करना होगा ।
बहराइच में राजस्व भवन की जमीन पर बनेगा ऑडिटोरियम
बहराइच में जिला पूर्ति कार्यालय के सामने स्थित राजस्व विभाग के जर्जर भवन को ध्वस्त कर उसकी भूमि पर ऑडिटोरियम का निर्माण कराया जाएगा। कैबिनेट बैठक में मंगलवार को राजस्व भवन को ध्वस्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया। 1960 में बना राजस्व भवन जर्जर हो गया है। जिलाधिकारी की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि बहराइच खास गांव नॉन.जेड.ए आबादी में स्थित राजस्व भवन अब उपयोगी नहीं रहा है। लिहाजा उसे ध्वस्त कर उसकी भूमि का अन्य किसी प्रयोजन में उपयोग किया जा सकता है। कैबिनेट ने भवन ध्वस्त कर उसकी भूमि पर नीति आयोग की ओर से उपलब्ध कराई गए बजट से ऑडिटोरियम का निर्माण कराने की भी मंजूरी दी है। ध्वस्तीकरण के बाद मलबा और अन्य सामग्री के निस्तारण से प्राप्त राशि को राजकोष में जमा कराया जाएगा।
टीएस मिश्रा विवि को संचालन प्राधिकार पत्र पर सहमति
प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को निजी क्षेत्र के अंतर्गत टीएस मिश्रा विश्वविद्यालय, लखनऊ को संचालन प्राधिकार पत्र जारी करने पर सहमति दे दी है। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 की धारा-7 में नए विश्वविद्यालय की स्थापना व नए विश्वविद्यालयों के नाम संशोधन को प्रख्यापित कराए जाने के लिए भी सहमति दी है। इसके तहत निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 में संशोधन की सहमति दी है।
13 भवनों का होगा ध्वस्तीकरण
राजा प्रताप बहादुर जिला चिकित्सालय प्रतापगढ़ के जीर्णशीर्ण 13 भवनों को ध्वस्त किया जाएगा। इस प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। राजा प्रताप बहादुर जिला अस्पताल को अब डॉ. सोनेलाल पटेल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। ऐसे में अस्पताल परिसर में 13 पुराने भवन हैं। ये पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इन भवनों को ध्वस्त करके यहां नया भवन बनाया जाना है। ऐसे में इन भवनों को गिराने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव रखा गया, जिसे मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत ध्वस्तीकरण की ह्रासित कुल लागत 311.89 है। ध्वस्तीकरण की लागत 18.73 लाख है। यानी कुल 330.62 लाख में से मलबा का मूल्य 60.71 लाख कम दिया जाएगा। बची राशि 269.91 लाख को बट्टे खाते में डालने का अनुमोदन दे दिया गया है।
मां विंध्यवासिनी देवी कॉरीडोर के विस्तारीकरण पर मुहर
कैबिनेट ने मां विंध्यवासिनी देवी कॉरीडोर के विस्तारीकरण/सुंदरीकरण के प्रस्ताव पर मुहर लगाई है। योजना के तहत आने वाले पार्सल में जनसुविधाओं के निर्माण के लिए अतिरिक्त भूमि और बने भवनों के ध्वस्तीकरण पर सहमति बनी। मलबा निस्तारण पर 63 लाख रुपये का व्यय होगा। बता दें कि इस कॉरीडोर से लगे चार प्रमुख मागोऱ्ं से संबंधित आवश्यक भूमि को खरीदने व परिसंपत्तियों को मुआवजा देने के लिए 3370 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति पूर्व में दी गई है।
रानीपुर टाइगर रिजर्व के पास पर्यटन विकास के लिए भूमि अधिग्रहण
शासन ने रानीपुर टाइगर रिजर्व, चित्रकूट के पास पर्यटन विकास के लिए भूमि पुर्नग्रहण पर सहमति दी है। मंगलवार को हुई कैबिनेट ने मानिकपुर में मारकुंडी निरीक्षण गृह व उसके आस-पास पर्यटन विकास के लिए लैंड बैंक के रूप में 49.364 हेक्टेयर भूमि पुर्नग्रहण पर सहमति बनी। इस जमीन के मिलने से एक तरफ पर्यटन विकास से जुड़ी चीजों को गति देने में आसानी होगी। साथ ही टाइगर रिजर्व के पशु-पक्षिओं के लिए भी आवश्यक कार्यवाही की जा सकेगी।
शाहबाद-रामपुर-बाजपुर मार्ग 205 करोड़ से होगा चौड़ा
शाहबाद-रामपुर-बाजपुर मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। 57.592 किमी लंबे इस मार्ग पर 205.36 करोड़ रुपये का व्यय आएगा। यह मार्ग जिम कॉर्बेट पार्क और नैनीताल को जाता है। शाहबाद-बिसौली-कछला गंगाघाट मार्ग का यातायात भी इस मार्ग से होकर गुजरता है। यह मार्ग बरेली के रामनगर को भी जोड़ता है, जो जैन धर्म का प्रसिद्ध तीर्थ है।
कैबिनेट फैसला-1
मथुरा में सर्किट हाउस बनने का रास्ता साफ
मथुरा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान की दो हेक्टयर भूमि सर्किट हाउस के निर्माण के लिए निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी कराएगा। इस बाबत लाए गए प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व देखते हुए मथुरा में सर्किट हाउस की काफी आवश्यकता है।
कुशीनगर में 1000 बंदियों की क्षमता वाली नई जेल का होगा निर्माण
कैबिनेट ने कुशीनगर जिले में नई जेल के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरित करने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है। कुशीनगर में 26.875 हेक्टेयर में एक हजार बंदियों की क्षमता वाले जिला कारागार के निर्माण के लिए किसानों 24.66 हेक्टेयर और पुर्नग्रहण से ग्राम समाज की 1.434 हेक्टेयर भूमि कारागार विभाग को प्राप्त हो चुकी है। शेष 0.781 हेक्टेयर भूमि के लिए राजस्व, लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग की भूमि कारागार विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है।
हाथरस में नई जेल 185 करोड़ में बनेगी
हाथरस में 1026 बंदियों की क्षमता वाली नई जेल का निर्माण होगा। कैबिनेट ने इसके लिए करीब 184.94 करोड़ रुपये की लागत की प्रशासकीय स्वीकृति दे दी है। बता दें कि वर्तमान में प्रदेश की कारागारों में कुल बंदी क्षमता 64,223 के सापेक्ष 1,19,526 बंदी निरुद्ध हैं। इससे जेलों में ओवरक्राउडिंग की स्थिति बनी हुई है। इसे कम करने के लिए नए कारागारों का निर्माण कराया जा रहा है। जिला कारागार अलीगढ़ में बंदी क्षमता 1178 है, जबकि कुल 4070 बंदी निरुद्ध हैं। इसमें हाथरस के 1280 बंदी शामिल हैं। इन बंदियों को अलीगढ़ से हाथरस न्यायालय ले जाना पड़ता है, जिसकी दूरी करीब 45 किमी है। इससे समय के साथ आर्थिक नुकसान भी होता है और विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय निकायों में गलत भुगतान की गई रकम की स्पष्ट होगी जवाबदेही
स्थानीय निकायों में आपत्तियों में फंसी धनराशि का डाटा केवल विभागवार ही नहीं बनेगा बल्कि प्रत्येक विभाग में भी जिम्मेदार अनुभागों का अलग अलग अध्याय बनेगा। कैबिनेट बैठक में वार्षिक लेखा परीक्षा प्रतिवेदन का अनुमोदन कर दिया गया।
स्थानीय निधि लेखा परीक्षा अधिनियम 1984 के तहत प्रदेश के स्थानीय निकायों और अनुदानित संस्थाओं की लेखा परीक्षा ''स्थानीय निधि लेखा परीक्षा'' द्वारा की जाती है। इसे लेकर विभाग द्वारा ''वार्षिक लेखा परीक्षा प्रतिवेदन'' तैयार किया गया है। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के संगठन और इसके प्राधिकार के स्रोतों, विभाग का बजट और स्वायत्तशासी संस्थाओं द्वारा लेखा परीक्षा में पाई गई तमाम आपत्तियों का अनुपालन संबंधित विभागों ने निर्धारित समय में नहीं किया है। कार्यवाही न किए जाने के कारण जिन आपत्तियों में फंसी धनराशि का खुलासा नहीं हुआ है, उनका विभागवार और अनुभाग वार ब्योरा अध्याय के रूप में तैयार किया जाएगा।
जीएसटी की दिक्कतें दूर करने के लिए संशोधन
प्रदेश में जीएसटी से जुड़ी दिक्कतों और क्रियान्वन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश माल और सेवाकर अधिनियम 2017 में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट ने मंजूर कर दिया।
शिक्षा सेवा चयन आयोग का प्रस्ताव अटका
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का प्रस्ताव मंगलवार को कैबिनेट में पारित नहीं हो सका। सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, सहायता प्राप्त इंटरकॉलेज, सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूल और प्राथमिक विद्यालयों तथा सहायता प्राप्त अरबी फारसी मदरसों में शिक्षको की भर्ती के लिए आयोग का गठन होना है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव पेश होने पर उसे अगली बैठक में रखने के निर्देश दिए।
प्रदेश में स्थापित होगा पहला अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल प्लांट, एक रुपये सस्ती मिलेगी बिजली
प्रदेश में बिजली उत्पादन के लिए 1600 मेगावाट की नई परियोजना स्थापित की जाएगी। इस पर एनटीपीसी और प्रदेश सरकार 50-50 प्रतिशत राशि खर्च करेंगे। यह प्रदेश का पहला अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल प्लांट होगा। इससे पावर कॉरपोरेशन को करीब एक रुपये सस्ती बिजली मिलेगी। इसे मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है। विभागीय दावा है कि एडवांस टेक्नोलॉजी, उच्च एफिशिएंसी, कोयले की कम खपत होने की वजह से बिजली की कीमत कम आएगी। इस परियोजना को ओबरा ‘डी’ परियोजना नाम दिया गया है।
लोकभवन में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सोनभद्र के ओबरा में 17985.27 करोड़ की लागत से 800-800 मेगावाट की परियोजना को मंजूरी दी गई। ओबरा ‘डी’ तापीय परियोजना की स्थापना एनटीपीसी और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। इसे मेजा ऊर्जा निगम प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से स्थापित किया जाएगा। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने परियोजना की मंजूरी के बाद बताया कि इस परियोजना की स्थापना में लगभग 12,589.68 करोड़ रूपये वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करके किया जाएगा। यह कुल लागत का 70 फीसदी है। बाकी 30 प्रतिशत धनराशि का 50 प्रतिशत यानी करीब 2 697.79 करोड़ रूपये राज्य सरकार एवं शेष धनराशि एनटीपीसी द्वारा लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना की स्थापना प्रदेश सरकार और एनटीपीसी के बीच ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान 11 फरवरी, 2023 को हुए एमओयू के तहत की जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि यह राज्य की पहली अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल यूनिट होगी। यह एडवांस टेक्नोलॉजी का प्लांट है। इनकी एफिशिएंसी काफी ज्यादा होती है और इसमें कोयले की खपत भी काफी कम होती है, जिससे बिजली उत्पादन की लागत में कमी आती है। उन्होंने बताया कि इसकी पहली यूनिट 50 माह में और दूसरी यूनिट 56 माह में तैयार हो जाएगी। इसके बाद 1600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन होने लगेगा।
4.89 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलने का दावा
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ओबरा ‘डी’ परियोजना से औसतन 4.89 रूपये प्रति यूनिट बिजली मिल सकेगी, जिसका लाभ उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। अभी यूपीपीसीएल द्वारा औसतन 5.50 रूपये प्रति यूनिट बिजली खरीदी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह प्लांट एनसीएल कोल माइंस के पास ही स्थापित होगा। जहां से इसे कोयला प्राप्त होगा। इससे कोयले की ढुलाई में कम खर्च आएगा। इस प्लांट को पानी ओबरा रिजर्वायर से मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस प्लांट की स्थापना करने के लिए लगभग 500 एकड़ जमीन उपलब्ध है। शेष जमीन और खरीदी जाएगी। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि प्रदेश में अभी विद्युत उत्पादन की कुल क्षमता 7682 मेगावाट है। इसमें से तापीय ऊर्जा की 7158 मेगावाट और जल विद्युत की 524 मेगावाट है।
उत्पादन निगम लगाए परियोजना तो 25 फीसदी सस्ती होगी बिजली : वर्मा
राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जिस परियोजना पर वाहवाही लूटी जा रही है, यदि उसे उत्पादन निगम खुद लगाता तो 25 फीसदी सस्ती बिजली मिलती। परियोजना लागत करीब 18 हजार करोड़ है। यानी परियोजना 11.25 करोड़ प्रति मेगा वाट में तैयार होगी। अभी इसमें बढ़ोतरी भी होगी। ऐसे में सरकार को इस परियोजना की लागत पर विचार करना चाहिए। इस पूरी परियोजना की शत प्रतिशत अंशधारिता राज्य विद्युत उत्पादन निगम को मिलना चाहिए। क्योंकि ओबरा डी परियोजना में जमीन, पानी आदि पर उत्पादन निगम का अधिकार था। इसमें किसी तरह की विधिक अड़चन भी नहीं आनी थी। यही वजह है कि एनटीपीसी ने चालाकी से यहां निवेश का प्रस्ताव बनाया और खुद शेयरधारक हो गया। उन्होंने बताया कि उत्पादन निगम सिर्फ दो फीसदी लाभ (रिटर्न आप एक्युटी) ले रहा है। जबकि एनटीपीसी 16 से 18 फीसदी लाभ लेगा। दूसरी खास बात यह है कि अप्रैल 2023 में ऊर्जा मंत्रालय ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से ऑप्टीमल जनरेशन मिक्स 2030 नामक एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें कोयला आधारित परियोजनाओं की लागत का अध्ययन किया गया था। इसमें स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2022 -2030 के कोयला आधारित परियोजनाओं की लागत करीब 8.34 से 7.85 करोड़ प्रति मेगावाट के बीच होगी। जबकि ओबरा डी परियोजना 11 करोड़ प्रति मेगावाट के ऊपर है। इसका खामियाजा प्रदेश की जनता को 25 साल तक झेलना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने पहले एनटीपीसी को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने का जिम्मा दिया था। लाभ देख एनटीपीसी एमओयू के जरिए अंशधारक बन बैठा। यह कृत्य इंसाइडर ट्रेडिंग के तहत आता है, जो गंभीर मामला है।
निजी बाल संरक्षण गृहों में रहने वाले बच्चों को भी मिलेगा चार हजार
केन्द्र सरकार द्वारा शुरू पिछले साल शुरू की गई 'मिशन वात्सल्य योजना' की गाईडलाइन को प्रदेश में भी लागू किया जाएगा । इस योजना के तहत स्वैच्छि संस्थाओं द्वारा संचालित अनुदानित बाल संरक्षण गृहों में रहने वाले बच्चों के भरण-पोषण के लिए अब राज्य सरकार भी प्रति बच्चे चार हजार रुपए प्रतिमाह धनराशि देगी । मौजूदा समय में राज्य सरकार द्वारा 2000 रुपये ही दिए जा रहे हैं। महिला कल्याण विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
दरअसल महिला कल्याण विभाग द्वारा विधि विरुद्ध कार्य करने वाले किशोरों के संरक्षण के लिए 2010 में ही समेकित बाल संरक्षण योजना की शुरूआत की गई थी। जिसका 2017 में नाम बदलकर बाल संरक्षण योजना और 2022-23 में इसे मिशन वात्सल्य योजना कर दिया गया था। साथ ही इस योजना की गाईडलाइन में संशोधन करते हुए राजकीय बाल संरक्षण गृहों में रहने वाले बच्चों के भरण-पोषण के लिए प्रति बच्चे 4 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया था । लेकिन स्वैच्छित संगठनों द्वारा संचालित बाल संरक्षण गृहों को प्रति बच्चे दो हजार रुपये ही दिए जा रहे थे । अब मिशन वात्सल्य योजनी का गईडलाइन को स्वीकार करते हुए स्वैच्छित संगठनों द्वारा संचालित बाल संरक्षण गृहों में रहने वाले प्रति बच्चे की दर से चार हजार रुपये प्रतिमाह की दर से धनराशि देने का निर्णय लिया गया है।