- बसें (मंजिली) व माल वाहक वाहनों के लिए परमिट शुल्क में 25-25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
- बड़ी टैक्सी (8 से 12 सीट वाले वाहन) को संभाग के भीतर चलने के लिए जारी परमिट शुल्क में 50 प्रतिशत व पूरे प्रदेश के लिए जारी होने वाले परमिट शुल्क में 33.33 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है।
- मोटर टैक्सी (6 सीटर क्षमता वाली टैक्सी) को एक संभाग में चलने के लिए जारी होने वाले परमिट के शुल्क मे 100 प्रतिशत तक और प्रदेश व इससे सटे तीन अन्य प्रदेशों के लिए
जारी परमिट के शुल्क मे 50-50 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। जबकि पूरे देश केलिए जारी होने वाले परिमिट शुल्क में 56.25 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
- कंडम वाहनों के स्थान पर खरीदे जान वाले नये वाहनों के लिए पुराने परमिट का रिप्लेसमेंट करने पर लगने वाले शुल्क में भी 23.08 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
-टैक्सी संचालन के लिए जारी होने वाले लाइंसेस शुल्क में भी 33.33 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
स्कूली वाहनों के किराये में हो सकती है वृद्धि
परमिट शुल्क में वृद्धि से ट्रक व मिनी ट्रकों से माल ढुलाई के किराये में वृद्धि होने की संभावना है। इसी तरह बड़े व छोटे टैक्सी वाहनों के परमिट शुल्क में वृिद्ध का असर आम जनता पर पड़ने की बात कही जा रही है। चूंकि स्कूली वाहन के रूप में अधिकांश टैक्सी ही चल रही हैं, इसलिए सरकार के इस फैसले का असर स्कूली बच्चों के वाहन किराये पर भी पड़ सकता है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि परमिट में जो वृद्धि की गई है वह पांच साल के लिए की गई है, इसलिए वाहनों के किराये पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
अर्थात मामूली असर पड़ेगा।