प्रदेश कैबिनेट ने दूसरे चरण में बनाए जाने वाले 14 मेडिकल कॉलेजों में से बुलंदशहर समेत सात के निर्माण की मंजूरी दे दी है। साथ ही इनमें जमीन की कमी से आने वाली अड़चन भी दूर कर दी है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 20 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। इन मेडिकल कॉलेजों में जितनी-जितनी जमीन की कमी है, उसकी व्यवस्था कर चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित किए जाने के अलग-अलग प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि कुल 14 मेडिकल कॉलेज दूसरे चरण में बनाए जाने हैं। इनमें चार को कैबिनेट पहले ही मंजूरी दे चुकी है। बुलंदशहर, गोंडा, सुल्तानपुर, चंदौली, अमेठी, औरैया व सोनभद्र के जिला चिकित्सालयों को मेडिकल कॉलेज में उच्चीकृत करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है।
उन्होंने बताया कि लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और ललितपुर में मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जाएगा। लेकिन इसके लिए कैबिनेट से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। वहां सामान्य अनुमति से ही कार्य शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक मेडिकल कालेज पर 325 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केंद्र व राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में मिलकर यह खर्च वहन करेंगे।
मंत्री ने बताया कि 70 वर्ष में प्रदेश में केवल 13 मेडिकल कॉलेज थे। योगी सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल में 27 मेडिकल कालेजों के निर्माण का काम शुरू किया गया है। पहले चरण में 13 मेडिकल कॉलेज बनाने को मंजूरी दी गई थी। 14 मेडिकल कालेज दूसरे चरण में बनने शुरू हो रहे हैं।