प्रदेश में निर्माणाधीन एवं असंचालित 51 राजकीय पॉलीटेक्निक व 40 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) को अब पीपीपी मोड पर निजी क्षेत्र की सहभागिता से संचालित किया जाएगा। इन संस्थाओं के भवन निर्माण का कार्य राज्य सरकार पूरा करके निजी संचालकों को सौंप देगी। इनका रखरखाव व मरम्मत निजी संचालक करेंगे। पहले चरण में शैक्षिक सत्र 202-22 में 15 राजकीय पॉलीटेक्निक व 16 आईटीआई का संचालन निजी क्षेत्र की सहभागिता से किया जाएगा। इस आशय के प्रस्ताव को शुक्रवार को कैबिनेट बाई सर्कु लेशन मंजूरी दे दी गई।
कैबिनेट प्रस्ताव के अनुसार पॉलीटेक्निक व आईटीआई को निजी क्षेत्र की सहभागिता से चलाने से सरकार के व्यय भार में कमी आएगी। पॉलीटेक्निक व आईटीआई को पीपीपी मोड पर संचालित करने के लिए यूपी डेस्को ने मैसर्स केपीएमजी को परामर्शदाता नियुक्त किया है। इन संस्थानों के भवन निर्माण का कार्य राज्य सरकार पूरा कराएगी। इसके बाद बिल्डिंग को निजी संचालक को उपलब्ध करा दिया जाएगा। भवन की मरम्मत व रखरखाव का पूर्ण दायित्व निजी संचालक का होगा। पॉलीटेक्निक में शैक्षिक व गैर शैक्षिक स्टाफ को रखने की कार्यवाही निजी संचालक द्वारा की जाएगी। प्रवेश के लिए राजकीय कोटे के तहत 30 फीसदी सीट निर्धारित की गई हैं। संस्थानों के संचालन की गुणवत्ता और उम्मीद के मुताबिक परिणाम सुनिश्चित करने के लिए कुछ परफार्मेंस इंडीकेटर तय किए गए हैं। इनके आधार पर समय-समय पर निजी संचालकों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। तय मानक पूरा नहीं होने पर अर्थडंद लगाया जा सकता है।
संस्थाओं के संचालन के लिए निजी सहभागियों को नियामक संस्थाओं ( एनसीवीटी, एससीवीटी, एआईसीटीई, तकनीकी शिक्षा परिषद, पीसीआई आदि) द्वारा तय मानकों को पूरा करते हुए उनके अनुमोदन से पाठ्यक्रम का संचालन करना होगा। संस्थानों के संचालन के लिए गठित बोर्ड में राज्य सरकार के संबंधित विभाग का एक प्रतिनिधि नामित किया जाएगा। प्राविधिक शिक्षा विभाग और व्यावसायिक शिक्षा विभाग तथा निजी सहभागियों के बीच किए गए समझौते केअनुसार संस्थाओं के प्रबंधन, संचालन, मरम्मत व नियमित मॉनिटरिंग के लिए स्टीयरिंग कमेटी गठित करने का प्रावधान है। स्टीयरिंग कमेटी में दोनों विभागों के विशेष सचिव, निदेशक प्राविधिक शिक्षा तथा निदेशक प्रशिक्षण एवं सेवायोजन के साथ ही अपर मुख्य सचिव वित्त एवं नियोजन द्वारा नामित विशेष सचिव के अधिकारी को सम्मलित किया जाएगा। इसकेलिए तैयार आरएएफ डाक्यूमेंट व कंसेशन एग्रीमेंट पर न्याय विभाग की विधिक आपत्ति प्राप्त कर ली गई है। न्याय विभाग की राय के मद्देनजर किसी संशोधन एवं परिवर्तन की आवश्यकता होगी तो उसके अनुमोदन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है।