मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश कामगार और श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई। आयोग बनने से प्रदेश के श्रमिकों और कामगारों की आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा पहले से ज्यादा मजबूत होगी। उन्हें अपने जिले में ही उनकी क्षमता के अनुसार, रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। वहीं, प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलेगी।
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन का सबसे अधिक असर श्रमिकों और कामगारों पर पड़ा। सीएम की पहल पर श्रमिकों के तात्कालिक हित के लिए कई कदम उठाए गए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रभारी मंत्री और विधायक को जिलाधिकारी आयोग से संबंधित हर गतिविधि की रिपोर्ट देंगे। प्रभारी मंत्री व विधायक हर महीने इसकी समीक्षा करेंगे।
मुख्यमंत्री होंगे आयोग के अध्यक्ष
आयोग के अध्यक्ष मुख्यमंत्री या उनकी ओर से नामित कैबिनेट मंत्री होंगे। श्रम एवं सेवायोजन विभाग के मंत्री संयोजक, औद्योगिक विकास एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो मंत्री आयोग के उपाध्यक्ष होंगे। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त सदस्य सचिव होंगे।
कृषि व ग्राम्य विकास मंत्री, कृषि उत्पादन आयुक्त, श्रम एवं सेवायोजन विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री की ओर से नामित औद्योगिक एवं श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि, उनकी ओर से ही नामित उद्योगों के विकास एवं श्रमिकों के हित में रुचि रखने वाले पांच जनप्रतिनिधि और विशेष आमंत्री इसके सदस्य होंगे।