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पढ़िए, अखिलेश सरकार 10 अहम फैसले

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प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून की गाइडलाइन को मंजूरी दे दी है। इसमें संशोधन के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अधिकृत किया गया है।
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इस फैसले में गरीबी रेखा से नीचे आने वाले सभी परिवार व अंत्योदय योजना के लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा मिलेगी।

शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू कामकाज, जूते-चप्पल की मरम्मत, फेरी व खोमचा लगाने वाले, रिक्शा चालक, दैनिक वेतन मजदूर, कुली, पल्लेदार भी इस कानून के तहत लाभ लेने के पात्र होंगे।

अन्य लोगों के लिए तय मानकों को पूरा करने वाले किन्नरों को भी इस कानून के तहत खाद्य सुरक्षा मिलेगी। इस कानून का लाभ आयकर दाताओं को नहीं मिलेगा।

इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग जिनके पास 100 वर्ग मीटर भूखंड, मकान या फ्लैट हैं उन्हे भी इसका लाभ नहीं मिलेगा। जिन परिवारों के पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं।
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2. ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेगी बिजली आपूर्ति

कैबिनेट के दूसरे अहम फैसले के तहत सरकार बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क के लिए 547.61 करोड़ देगी। राज्य सरकार ने 2016 से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बढ़ाने के लिए 1825.36 करोड़ रुपये के ट्रांसमिशन नेटवर्क को मंजूरी दे दी है।

इसमें 30 प्रतिशत अंशपूंजी लगभग 547.61 करोड़ रुपये सरकार की होगी। ये घोषणा मुख्यमंत्री अ‌खिलेश यादव ने मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में की है।

वहीं मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बताया कि 2016 से गांवों को कम से कम 16 घंटे और शहरी क्षेत्रों को 22 घंटे बिजली आपूर्ति की योजना बनाई गई है।

बिजलीघरों से बिजली की निकासी के लिए 400 केवी के दो, 220 केवी के आठ तथा 132 केवी के 16 नए ट्रांसमिशन उपकेंद्र और इससे संबंधित लाइनों का निर्माण कराया जाना है।

इस पर लगभग 1825.36 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। राज्य सरकार के अलावा इसमें 1277.75 रुपये विद्युत वित्त निगम (पीएफसी) या ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) से बतौर ऋण लेने का प्रस्ताव है।

3. इमारतों बनेंगी तयशुदा समय पर

कैबिनेट ने फिक्स प्राइस कांट्रेक्ट के मॉडल डॉक्यूमेंट को भी मंजूरी दे दी है। इसके चलते सभी सरकारी इमारतें सही लागत और तयशुदा समय पर बनाए जाएंगे।

प्रदेश में 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले सरकारी भवनों को फिक्स प्राइस कांट्रेक्ट व्यवस्था से बनाने के लिए इसके मॉडल डॉक्यूमेंट को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई।

इस व्यवस्था के लागू हो जाने के बाद सरकारी कार्यदायी संस्थाओं द्वारा निर्माण कार्य में विलंब होने पर लागत में वृद्धि नहीं की जा सकेगी। सरकार और कार्यदायी संस्था के बीच निश्चित लागत और समय सीमा का अनुबंध होगा।

इससे कार्यदायी संस्थाओं पर तय बजट में निश्चित समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा कराने का दबाव रहेगा। कैबिनेट ने प्रदेश सरकार की फाइनेंसियल हैंडबुक में इसका प्रावधान कर दिया है।

साथ ही इसमें जरूरत के आधार पर शिथिलीकरण भी करने का निर्णय किया गया है। इसके लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है।

इसमें कार्यों में देरी होने पर निर्माण एजेंसी पर हर्जाना तथा जिम्मेदार कार्मिकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है।

4. नदियां अब निजी हाथों में

सरकार ने अब नदियों की सफाई की जिम्मेदारी निजी प्रोफेशनल कंपनियों को दी है। कैबिनेट ने सिंचाई विभाग की कार्य योजना को मंजूरी दे दी है।

प्रोफेशनल कंपनियां करेंगी नदियों की सिल्ट की सफाई कराएगी।  इन कंपनियों को नदियों से बालू आदि के खनन की अनुमति दी जाएगी जिससे वह अपना खर्च वहन करेंगी और लाभांश का एक हिस्सा सरकार को भी देंगी।

जो कंपनी सबसे ज्यादा दर की बोली लगाएगी, उसे ही काम सौंपा जाएगा। इसके तहत  नदी, जलाशय, नहर आदि का आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से सर्वेक्षण कराया जाएगा।

उन भागों का चिह्नीकरण किया जाएगा जहां सिल्ट के कारण प्रवाह रुक रहा है या नदियों में घुमाव हो रहा है। कई जगह इसकी वजह से नदियों में कटाव भी होता है जिससे बाढ़ आती है।

यह कार्य सेटेलाइट मैपिंग, गूगल सर्विसेज आदि के माध्यम से कराया जाएगा। सिल्ट, बालू, बजरी को बाहर निकालने व उसके भंडारण में होने वाले खर्च का आकलन कर एस्टीमेट तैयार किया जाएगा।  

टेंडर की नियमावली व शर्तें प्रमुख अभियंता सिंचाई तय करेंगे। टेंडर में हिस्सा लेने वालों को निर्धारित रॉयल्टी जमा कराने के बाद खनन से निकाली जाने वाली सामग्री बेचने का अधिकार होगा।

इसकी मॉनिटरिंग सिचाई विभाग करेगा। विभाग के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बताया कि इससे अवैध खनन नहीं होगा। निजी कंपनी उतना ही खनन करेगी जितने की उसे अनुमति दी जाएगी।

नदियों की सिल्ट सफाई में काफी पैसा खर्च होता है, इसलिए सरकारी धन खर्च करने के बजाय प्रोफेशनल कंपनियों से यह काम कराने का फैसला किया गया है।

5. इनकी बढ़ेगी सेलरी

राज्य सरकार ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और राज्य संपत्ति विभाग के कर्मियों की वेतन विसंगतियां दूर करने का भी निर्णय किया है।

कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय के मुताबिक केजीएमयू के डेंटल मैकेनिक के 20 पदों तथा डेंटल हाईजिनिस्ट के 32 पदों पर वेतन बैंड-2 व ग्रेड वेतन 4600 मंजूर किया गया है।

प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रास्थेटिक मैकेनिक के एक पद पर वेतन बैंड-2 व ग्रेड वेतन 4800 देने का निर्णय किया गया है।

राज्य संपत्ति विभाग के टेलीफोन ऑपरेटर संवर्ग को भी पुनर्गठित कर दिया गया है। इसमें कई पदों के ग्रेड में परिर्वतन किया गया है।

इसके 50 प्रतिशत पद वेतन बैंड-1 व ग्रेड वेतन 2000, वरिष्ठ टेलीफोन ऑपरेटर पदनाम से 30 प्रतिशत पद वेतन बैड-1 व ग्रेड वेतन 2800 तथा इससे वरिष्ठ टेलीफोन ऑपरेटर पदनाम से 20 प्रतिशत पद वेतन बैंड-2 व ग्रेड वेतन 4200 में रखे जाने का निर्णय किया गया है। टेलीफोन ऑपरेटर संवर्ग में 74 पद हैं।

6. इमामबाड़ा होग और भी रोशन

प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कई बड़े फैसले कैबिनेट ने किण्‍ है। इसमें से एक है इमामबाड़े को रोशन करना।

पर्यटकों को लुभाने के लिए बड़ा इमामबाडा व छोटा इमामबाडा के पास हुसैनाबाद टीले वाली मस्जिद से जामा मस्जिद मोड़ तक की सड़के चौड़ी की जाएंगी।

साथ ही इन चौड़ी सड़कों पर खूबसूरत लाइटें भी लगाई जाएंगी। यह निर्णय मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में किया गया। पर्यटक स्थल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फुटपाथ पर 2.36 लाख रुपये के एक पोल लगाते हुए उस पर लाइटें लगाई जाएंगी।

लोक निर्माण विभाग ने पहले इन कामों के लिए कम लागत बताई थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाए जाने की वजह से कैबिनेट मंजूरी के लिए रखा गया। इन कार्यों पर 3.16 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

7. ऐसे मिलेगा उर्दू शिक्षा को बढ़ावा

प्रदेश में उर्दू शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मदरसों को अनुदान पर लेने के लिए मानक बदलने के प्रारूप संबंधी प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई।

कैबिनेट ने मानक में संशोधन के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अधिकृत किया है। वे तय करेंगे कि मानक में क्या बदलाव किया जाए।

इसके बाद मानक पर खरे उतरने वाले मदरसों को अनुदान पर लिया जाएगा। अल्पसंख्यक विभाग की जानकारी के मुताबिक वर्ष 1998 तक आलिया स्तर के 246 मदरसे अनुदान की प्रतीक्षा सूची में थे।

वर्ष 2010 में 100 मदरसों को अनुदान सूची पर लिया गया। मानक संशोधन के बाद 146 मदरसों को अनुदान सूची पर लिया जाएगा।

8. नोएडा में भी अब दौड़ेगी मेट्रो

राज्य सरकार ने नोएडा से ग्रेटर नोएडा के बीच मेट्रो रेल परियोजना शुरू करने के लिए नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एनएमआरसी) के गठन करने को स्पेशल परपज वेहिकिल (एसपीवी) बनाने की मंजूरी दे दी है।

मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इसके लिए मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए) तथा आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (एओए) के प्रारूप को अनुमोदित किया गया।

इसके अलावा नोएडा से ग्रेटर नोएडा मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्वयन के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) से टर्न-की कंसलटेंसी फॉर एक्जीक्यूशन ऑफ मेट्रो कॉरिडोर के माध्यम से कराने के एग्रीमेंट को भी मंजूरी दी गई।

डीएमआरसी ने अप्रैल 2014 में केंद्रीय कर को शामिल करते हुए 5,533 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लगाते हुए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) दिया था। कैबिनेट इसे भी अनुमोदित किया है।

9. ऐसे बचेगी बिजली

बिजली की किल्लत को देखते हुए सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए रूफटॉप सोलर फोटो वोल्टाइक पावर प्लांट नीति 2014 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

इसके तहत सौर ऊर्जा पर आधारित पावर प्लांट छत पर लगाए जा सकेंगे। इससे जहां जमीन की बचत होगी, वहीं कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन भी में कमी आएगी।  

रूफटॉप सोलर पावर प्लांट से मार्च 2017 तक 20 मेगावाट क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। निजी, सरकारी भवनों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों व वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की छतों पर रूफटॉप सोलर फोटो वोल्टाइक पावर प्लांट्स लगाने पर इससे मिलने वाली बिजली का उपयोग संबंधित भवन के उपभोक्ता करेंगे।

उनकी जरूरत से अधिक बिजली होने पर इसे ग्रिड में जोड़ा जा सकेगा। इससे ईंधन से बिजली उत्पादन पर निर्भरता में कमी आएगी।

पारेषण व वितरण अवस्थापना पर होने वाले निवेश में बचत के साथ पारेषण नेटवर्क हानियों में कमी आएगी। साथ ही विद्युत शिड्यूलिंग के प्रबंधन की लागत में कमी आएगी।
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10. पांच करोड होंगे इनके हाथ

सरकार ने विभागीय मंत्रियों व वित्त मंत्री के वित्तीय अधिकार बढ़ाने के साथ ही पांच करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने का अधिकार प्रशासकीय विभागों को दे दिया है।

इसके लिए बजट मैनुअल में संशोधन के प्रस्ताव को प्रदेश कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। किसी परियोजना की लागत पांच करोड़ रुपये तक है तो उस विभाग का मुखिया परियोजना का एस्टीमेट तैयार कराएगा।  

वही उस पर सक्षम अधिकारी का अनुमोदन लेगा और फिर वित्तीय स्वीकृति जारी करेगा। इसके लिए न तो वित्त मंत्री की अनुमति लेनी होगी और न ही मुख्यमंत्री की।

फैसले के अनुसार पांच करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं के संबंध में विभागीय मंत्री और पांच करोड़ से अधिक व 15 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर वित्त मंत्री की अनुमति लेनी होगी। 15 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा सकेंगी।
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