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यूपी : हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर सरकार ने बताया, जहरीली शराब से मौत देने वालों को हो सकेगी फांसी तक की सजा

Sun, 18 Jul 2021 11:30 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

2015 में दायर इस याचिका में प्रदेश में कई साल से अवैध जहरीली शराब बनाने व बिक्री से लोगों के जान गंवाने की न्यायिक जांच की गुजारिश की गई थी।
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लखनऊ हाईकोर्ट
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के समक्ष एक मामले में राज्य सरकार ने जवाब पेश करते हुए कहा कि अगर मिलावटी (जहरीली) शराब से किसी की मौत होती है, तो इसके सौदागरों को फांसी तक की सजा का प्रावधान कानून में संशोधन के जरिए किया गया है। सरकार के जवाबी हलफनामे के मद्देनजर कोर्ट ने जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया।

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न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला ‘वी द पीपल’ नामक संस्था के महासचिव प्रिंस लेनिन की पीआईएल पर सुनाया। वर्ष 2015 में दायर इस याचिका में प्रदेश में कई साल से अवैध जहरीली शराब बनाने व बिक्री से लोगों के जान गंवाने की न्यायिक जांच की गुजारिश की गई थी। साथ ही यहां मलिहाबाद के दतली गांव में हुए जहरीली शराब कांड जैसी घटनाओं को रोकने को सख्त दिशा निर्देश जारी करने का आग्रह भी किया गया था।

सरकारी वकील ने मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल कर कहा कि यूपी सरकार ने वर्ष 2017 में आबकारी संशोधन अध्यादेश जारी कर आबकारी कानून में संशोधन कर दिया है। इसके तहत अगर कोई शराब में जहरीला नशीला पदार्थ मिलाकर बेचेगा और इससे किसी की मृत्यु हो जाती है तो ऐसा करने वाले को फांसी या आजीवन कारावास तक की सजा समेत 10 लाख तक के जुर्माने से दंडित किए जाने का प्रावधान किया गया है।
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इसी तरह मिलावटी शराब के करोबार को करने वाले के कृत्य से किसी को अपंगता या गम्भीर चोट पहुंचने के केस में भी सख्त सजा व जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। कहा कि आबकारी अधिनियम की धारा 63 में जहरीली शराब बनाने व बिक्त्रस्ी को सख्ती से रोकने के लिए पर्याप्त प्रावधान सरकार ने किए हैं। अदालत ने इसके मद्देनजर याचिका का निपटारा कर दिया।

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