टोलियों ने लोगों तक संदेश पहुंचाना शुरू भी कर दिया है। प्रत्येक टोली 5-10 लोगों के छोटे ग्रुप के साथ बैठकें कर रही है। सूत्रों ने बताया कि संघ की टोलियां इन बैठकों में सीधे तौर पर भाजपा का समर्थन नहीं करतीं, बल्कि राष्ट्रहित, हिंदुत्व, सुशासन, विकास, लोक कल्याण और स्थानीय मुद्दों पर गहन चर्चा के माध्यम से लोगों की राय को आकार दे रही हैं।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
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सूत्रों का कहना है कि टोलियां बनाने से पहले संघ और उसके सहयोगी संगठनों ने रणनीति बनाने के लिए लखनऊ समेत चुनाव वाले अन्य राज्यों में भी बैठक कर खाका तैयार किया है। संघ का यह कदम इसलिए भी अहम है कि हाल ही में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद से ही संघ ने अन्य राज्यों के आम चुनावों के साथ ही यूपी के उपचुनाव में भी इसी रणनीति पर काम करने का फैसला किया है।
हरियाणा में भी टोलियों ने की थी सवा लाख बैठकें
सूत्रों के मुताबिक हरियाणा में बनाई गई संघ कार्यकर्ताओं की टोलियों ने प्रदेश भर में करीब सवा लाख छोटी-छोटी बैठकें की थीं। इन बैठकों ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार की जाट-केंद्रित नीतियों सहित अन्य मुद्दों को उजागर कर हरियाणा में जनमत बनाया था। इन टोलियों के बदौलत ही जनता में अग्निपथ भर्ती योजना को लेकर लोगों की चिंताओं को दूर करने और किसानों से बातचीत करके उनकी भावनाओं को भाजपा के पक्ष में करने में कामयाबी मिली थी।