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यूपी उपचुनाव: चन्द्रशेखर-ओवैसी के हाथों भी बसपा गंवा रही है अपनी जमीन, सिर्फ सपा-भाजपा ही नहीं कर रहे नुकसान

Sat, 23 Nov 2024 07:40 PM IST
रोहित मिश्र अशोक मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ

सार

UP by-election result: बसपा के वोट बैंक के दावेदार सिर्फ कांग्रेस, भाजपा या सपा ही नहीं हैं। दलित और मुसलमानों की राजनीति करने वाली कुछ छोटी पार्टियां भी उसका वोट हथिया रही हैं। 
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बसपा का प्रदर्शन रहा कमजोर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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लोकसभा चुनावों के बाद एक बार फिर बसपा का प्रदर्शन प्रदेश में दयनीय रहा। नौ सीटों में से पांच सीटें ऐसी रहीं जिनमें बसपा के प्रत्याशी को दस हजार से कम वोट मिले। इन चुनावों में लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी से नगीना सीट को छीनने वाली आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने एक बार फिर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। उपचुनाव में बसपा की सियासी जमीन खिसकने का आलम कुछ ऐसा रहा कि मीरापुर और कुंदरकी में उसके प्रत्याशियों से ज्यादा आजाद समाज पार्टी और ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम) ने वोटरों के दिल में जगह बना ली। बसपा के मुकाबले आजाद समाज पार्टी ने अपना दम दिखाया तो एआईएमआईएम ने भी यूपी में अपने पैर जमाए हैं।

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सियासी जानकारों की मानें तो उपचुनाव में मायावती और आकाश आनंद पर चंद्रशेखर आजाद और ओवैसी भारी पड़े, जो भविष्य में बसपा को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। बता दें कि मीरापुर सीट पर बसपा को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 23979 वोट मिले थे, जो इस बार घटकर महज 3248 रह गए। मीरापुर में आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी जाहिद हुसैन को 22661, जबकि एआईएमआईएम के प्रत्याशी मोहम्मद अरशद को 18869 वोट मिले हैं। इसी तरह कुंदरकी में पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा को 42,742 वोट मिले थे, जो इस बार घटकर मात्र 1051 रह गए। इस सीट पर आजाद समाज पार्टी के चांद बाबू 14201 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे, जबकि एआईएमआईएम के मोहम्मद वारिस 8111 वोट पाकर चौथे स्थान पर रहे। हालांकि बाकी सीटों पर बसपा के प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे।

बसपा सुप्रीमो मायावती व सांसद चंद्रशेखर आजाद। - फोटो : amar ujala
चुनावी नतीजों पर गौर करें तो करहल, कुंदरकी, मीरापुर और सीसामऊ में बसपा धड़ाम हो गई। चारों सीटों पर बसपा का वोट पांच अंकों की सीमा तक भी नहीं पहुंच सका, जो प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने की वजह बन गया। मीरापुर और कुंदरकी में तो वोटरों ने बसपा से ज्यादा आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को तरजीह दी है। बसपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन कटेहरी सीट पर रहा, जहां पार्टी प्रत्याशी अमित वर्मा ने 41,647 वोट हासिल किए। वहीं मझवां के प्रत्याशी दीपक तिवारी उर्फ दीपू तिवारी ने 34,927 और फूलपुर के प्रत्याशी जितेंद्र कुमार सिंह को 20,342 वोट मिले। 
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दलितों को रास आ रहे चंद्रशेखर

चन्द्रशेखर आजाद और मायावती। - फोटो : अमर उजाला
दरअसल, बसपा के बड़े नेताओं के मुकाबले चंद्रशेखर आजाद की सक्रियता दलित वोटरों को रास आ रही है। वहीं मुस्लिमों के मुद्दों पर भी उनकी मुखरता उनकी लोकप्रियता में इजाफा कर रही है। इसके विपरीत लोकसभा चुनाव में बसपा के नेशनल कोआर्डिनेट आकाश आनंद के भड़काऊ भाषण के बाद यूपी से उनको दूर रखने की पार्टी की रणनीति ने नुकसान पहुंचाया है। चंद्रशेखर के मुकाबले बसपा का कोई भी दमदार नेता वर्तमान सियासी परिदृश्य में अपनी पहचान बना पाने में कामयाब नहीं हो सका है।
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