बसपा सुप्रीमो मायावती व सांसद चंद्रशेखर आजाद।
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चुनावी नतीजों पर गौर करें तो करहल, कुंदरकी, मीरापुर और सीसामऊ में बसपा धड़ाम हो गई। चारों सीटों पर बसपा का वोट पांच अंकों की सीमा तक भी नहीं पहुंच सका, जो प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने की वजह बन गया। मीरापुर और कुंदरकी में तो वोटरों ने बसपा से ज्यादा आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को तरजीह दी है। बसपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन कटेहरी सीट पर रहा, जहां पार्टी प्रत्याशी अमित वर्मा ने 41,647 वोट हासिल किए। वहीं मझवां के प्रत्याशी दीपक तिवारी उर्फ दीपू तिवारी ने 34,927 और फूलपुर के प्रत्याशी जितेंद्र कुमार सिंह को 20,342 वोट मिले।
चन्द्रशेखर आजाद और मायावती।
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दरअसल, बसपा के बड़े नेताओं के मुकाबले चंद्रशेखर आजाद की सक्रियता दलित वोटरों को रास आ रही है। वहीं मुस्लिमों के मुद्दों पर भी उनकी मुखरता उनकी लोकप्रियता में इजाफा कर रही है। इसके विपरीत लोकसभा चुनाव में बसपा के नेशनल कोआर्डिनेट आकाश आनंद के भड़काऊ भाषण के बाद यूपी से उनको दूर रखने की पार्टी की रणनीति ने नुकसान पहुंचाया है। चंद्रशेखर के मुकाबले बसपा का कोई भी दमदार नेता वर्तमान सियासी परिदृश्य में अपनी पहचान बना पाने में कामयाब नहीं हो सका है।