आकाश आनंद को लेकर बनी है मायावती की दुविधा।
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दलितों पर हमले और उत्पीड़न के बढ़ते मामलों को लेकर जारी सियासत ने बहुजन समाज पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सपा सांसद रामजी सुमन पर हुए हमले को मुद्दा बनाकर दलितों के बीच अपनी सियासी जमीन को मजबूत कर रही है, जिससे बसपा को अपना वोटबैंक खिसकने की चिंता सताने लगी है।
दरअसल, बसपा गौतमबुद्ध और डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त करने, दलितों की बरात पर होने वाले हमले और उनके उत्पीड़न के खिलाफ आवाज तो उठा रही है, लेकिन उसे उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिल रहा है। इस पर पार्टी हाईकमान ने वरिष्ठ नेताओं को अब दलितों के साथ होने वाली घटनाओं की गहनता से पड़ताल करने और उनके घरों पर जाकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद पार्टी इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन शुरू करने की रणनीति तय करेगी। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि बसपा को सपा से ज्यादा आजाद समाज पार्टी से नुकसान हो रहा है। पार्टी में बीते दिनों मची उठापटक ने भी समर्थकों को विचलित किया है। इससे पहले बीते लोकसभा चुनाव में भी सपा के पीडीए के नारे ने दलितों को भ्रमित किया था। जानकारों की मानें तो बदली परिस्थितियों में दलित वोटबैंक असमंजस में है और नए विकल्प तलाश रहा है।