सामाजिक रुप से सक्रिय रहती हैं शालिनी।
- फोटो : अमर उजाला।
राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद शालिनी सिंह ने अपनी पहचान साहित्य और कला के माध्यम से बनाई। उनकी चर्चित पुस्तक 'बेबाक हूं, बेअदब नहीं' को व्यापक चर्चा मिली। सोशल मीडिया पर उनकी कविताएं अक्सर वायरल होती रहती हैं। कई मंचों पर उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर विचार रखे हैं।
कविता के अलावा चित्रकला में भी उनकी गहरी रुचि है। उनकी कई पेंटिंग प्रदर्शनियों में प्रदर्शित हो चुकी हैं। साहित्य और कला के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ी है।
पिछले कुछ वर्षों में शालिनी सिंह ने खुद को केवल एक राजनीतिक परिवार की सदस्य तक सीमित नहीं रखा। श्रमिकों, महिलाओं, युवाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यही कारण है कि उनकी गतिविधियों को अब गंभीरता से देखा जाने लगा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामाजिक मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहकर शालिनी अपनी अलग सार्वजनिक पहचान तैयार कर रही हैं। उनकी शैली पारंपरिक राजनीति से कुछ अलग दिखाई देती है, जहां जनसंपर्क के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक संवाद पर भी जोर है।
सामाजिक जीवन में बनी है सक्रियता।
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शालिनी सिंह ऐसे राजनीतिक परिवार से आती हैं जिसकी पूर्वांचल और अवध की राजनीति में मजबूत पकड़ रही है। उनके पिता बृजभूषण शरण सिंह छह बार सांसद रह चुके हैं। भाई करण भूषण सिंह कैसरगंज से सांसद हैं, जबकि दूसरे भाई प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर से विधायक हैं।
ऐसे में उनकी बढ़ती सक्रियता को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने अभी तक किसी चुनावी दावेदारी का संकेत नहीं दिया है, लेकिन सामाजिक मुद्दों पर उनकी लगातार मौजूदगी राजनीतिक संभावनाओं की चर्चाओं को जरूर जन्म दे रही है।
फिलहाल शालिनी सिंह कविता, कला और सामाजिक सरोकारों के जरिए अपनी अलग पहचान गढ़ती दिखाई दे रही हैं। लेकिन सूर्या हत्याकांड से लेकर नोएडा के श्रमिक आंदोलन तक उनकी सक्रिय भूमिका ने यह संकेत जरूर दिया है कि आने वाले समय में उनकी सार्वजनिक भूमिका और व्यापक हो सकती है। यही कारण है कि राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही हलकों की नजर अब शालिनी सिंह की अगली पहल पर टिकी हुई है।