भाजपा पिछले एक साल से पंचायत चुनाव लड़ने का ऐलान करती चली आ रही है। पर, चुनाव की तैयारियों पर नजर डालें तो वह फिसड्डी ही दिखती है। सपा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। चुनाव लड़ने वालों के बायोडॉटा लिए जा रहे हैं। इसके विपरीत भाजपा अभी सदस्यता अभियान में ही उलझी है।
इस स्थिति ने मंडल (ब्लॉक) व जिला पदाधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि उन्हें पंचायत चुनाव लड़ना भी है या नहीं।
भाजपा की पिछले अगस्त में वृंदावन में और उसके बाद मिर्जापुर में हुई पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर कई कार्यक्रम तय किए गए थे।
ऐलान हुआ था कि ग्राम पंचायतों से लेकर जिला पंचायतों तक चुनाव में भाजपा औपचारिक तौर पर हिस्सा लेगी। इसके लिए पार्टी के स्तर पर पंचायती राज प्रकोष्ठ से जुड़े कार्यकर्ताओं को स्थानीय समस्याओं पर फोकस करने को कहा गया था। पर, यह सब योजनाएं फाइलों में बंद हो गई है।
इसके विपरीत सपा में पंचायत का चुनाव लड़ने वालों के बॉयोडाटा ही नहीं लिए जा रहे हैं। जिलाध्यक्षों व महामंत्रियों को शहरों में रहकर पढ़ाई कर रहे नवजवानों से भी संपर्क व संवाद बढ़ाकर उनके नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का काम भी सौंप दिया गया है।
यह भी कहा गया है कि सपा के लोग इन युवाओं को प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं के लिए किए गए कामों की जानकारी दें। उन्हें बताएं कि इंटरमीडिएट पास छात्रों को लैपटॉप देने का काम सपा ने किया तो शैक्षिक प्रमाण पत्रों को राजपत्रित अधिकारियों से प्रमाणित कराने की बाध्यता खत्म करके भी नवजवानो को राहत भी दी। अन्य कई कार्य किए।