किसी न किसी बहाने कार्यकर्ताओं की सक्रियता बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही भाजपा ने अब पंचायत चुनाव को लेकर जनता के बीच बने रहने की तैयारी की है । इसके लिए मतदाता सूची की तैयारी से लेकर पंचायतों के आरक्षण के कामों तक पार्टी नेताओं को सक्त्रिस्यता से जोड़ने का निर्णय किया गया है। जिसके लिए कार्यकर्ता सोमवार से मैदान में उतरेंगे ।
पंचायत चुनाव के लिए 28 दिसंबर से 3 जनवरी तक मतदाता सूची के निरीक्षण और दावे व आपत्तियां लेने की प्रक्रिया चलेगी । इसके बाद 4 से 11 जनवरी तक दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा । भाजपा ने सेक्टर एवं बूथ कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि पार्टी के समर्थक प्रत्येक पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने पर पूरा ध्यान दिया जाए ।
यह है वजह
दरअसल, भाजपा सोची-समझी रणनीति के तहत पंचायत चुनाव में पहली बार इतनी दिलचस्पी ले रही है। रणनीतिकारों की मंशा इसके सहारे गांवों तक की राजनीति में पार्टी की प्रासंगिकता बनाए रखने की है । भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक कहते भी हैं कि राजनीतिक कार्यकर्ता और लोकतांत्रिक पद्धति में निष्ठा के नाते कार्यकर्ताओं को पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक की जनतांत्रिक प्रक्त्रिस्या की जानकारी होनी ही चाहिए। ताकि जन अपेक्षाओं व आकांक्षाओं की जानकारी कार्यकर्ताओं को रहे ।
बूथों व सेक्टरों पर सक्रियता
मतदाता सूची के बाद वार्डों व पंचायतों के आरक्षण की प्रक्रिया चलनी है। वैसे तो पार्टी ने अधिकृत रूप से फिलहाल जिला पंचायत सदस्यों के ही चुनाव लड़ने की तैयारी की है । पर, नेतृत्व इस विकल्प को भी ध्यान में रखकर तैयारी कर रहा है कि कोई कार्यकर्ता यदि ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य का भी चुनाव लड़े तो उसे भी स्थानीय स्तर पर संगठन के लोगों का सहयोग मिले ।
सम्मेलनों का भी चलेगा सिलसिला
मतदाता सूची और आरक्षण अभियान के बाद पार्टी ने सम्मेलनों की योजना बनाई हैं । जिसमें प्रदेश के नेता जाकर स्थानीय लोगों को संबोधित करेंगे और उन्हें गांव के विकास के लिए केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकारों के कामों की जानकारी लोगों को देंगे । साथ ही उन्हें पंचायतों के अधिकारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए भाजपा की तरफ से उठाए गए कदमों के बारे में बताएंगे ।