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UP: दो लड़कों की जोड़ी ने मोदी-योगी के गढ़ में किया बड़ा सियासी उलटफेर, मोदी का जीत का मार्जिन भी घटा

Wed, 05 Jun 2024 01:28 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

सपा ने न सिर्फ आजमगढ़ सीट को वापस लिया है, बल्कि 2019 में भाजपा की जीत वाली सात सीटें सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, मछलीशहर, बलिया, बस्ती, संतकबीरनगर और चंदौली सीट के अलावा एनडीए की साझेदार अपना दल (एस) की राबर्ट्सगंज सीट पर कब्जा जमाया है।
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अखिलेश यादव व राहुल गांधी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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पूर्वी यूपी की सबसे हॉट सीट रही वाराणसी के मतदाताओं के रुझान ने भी भाजपा को मायूस किया है। दो लड़कों की जोड़ी ने मोदी-योगी के गढ़ में बड़ा सियासी उलटफेर किया है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वाराणसी से तीसरी बार उतरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत का मार्जिन पिछले चुनाव की तुलना में जहां आधे से भी कम हुआ है, वहीं चंदौली से हैट्रिक लगाने वाले कैबिनेट मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय को हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे ही एनडीए के कुर्मी चेहरे के तौर पर खुद को पेश करने वालीं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल को भी कड़े संघर्ष के बाद जीत मिली है। जबकि नौवीं बार सांसद बनने की दौड़ में रहीं मेनका गांधी को पराजय का सामना करना पड़ा है।

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बताते चलें कि 2019 में सपा को पूर्वांचल में सिर्फ एक सीट आजमगढ़ मिली थी। यहां से अखिलेश यादव चुनाव जीते थे, लेकिन विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी। उपचुनाव में भाजपा ने इस सीट पर कब्जा जमा लिया था, लेकिन इस बार के चुनाव में बाजी पलट गई। सपा ने न सिर्फ आजमगढ़ सीट को वापस लिया है, बल्कि 2019 में भाजपा की जीत वाली सात सीटें सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, मछलीशहर, बलिया, बस्ती, संतकबीरनगर और चंदौली सीट के अलावा एनडीए की साझेदार अपना दल (एस) की राबर्ट्सगंज सीट पर कब्जा जमाया है। जबकि भाजपा के कब्जे वाली इलाहाबाद सीट पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया है।

भाजपा की शिकस्त के प्रमुख कारण :
- इस क्षेत्र में जातीय समीकरण के सामने विकास व कल्याणकारी योजनाएं बेअसर रहीं।
- संविधान-आरक्षण के मुद्दे से दलित व पिछड़े मतों का बिखराव रोकने में भाजपा असफल रही।
- कई सांसदों के खिलाफ बने माहौल के बावजूद उन्हें उतारना भी महंगा पड़ा।
- टिकट वितरण में पार्टी के काडर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा।

लोकसभा सीट -- 2019 -- 2024
सुल्तानपुर -- भाजपा -- सपा
अंबेडकरनगर -- बसपा -- सपा
प्रतापगढ़ -- भाजपा -- सपा
फूलपुर -- भाजपा -- भाजपा
इलाहाबाद -- भाजपा -- कांग्रेस
श्रावस्ती -- बसपा -- सपा
डुमरियागंज -- भाजपा -- भाजपा
बस्ती -- भाजपा -- सपा
संतकबीर नगर -- भाजपा -- सपा
लालगंज -- बसपा -- सपा
आजमगढ़ -- सपा -- सपा
जौनपुर -- बसपा -- सपा
मछलीशहर -- भाजपा -- सपा
भदोही -- भाजपा -- भाजपा
महाराजगंज -- भाजपा -- भाजपा
गोरखपुर -- भाजपा -- भाजपा
कुशीनगर -- भाजपा -- भाजपा
देवरिया -- भाजपा -- भाजपा
बांसगाव -- भाजपा -- भाजपा
घोसी -- बसपा -- सपा
सलेमपुर -- भाजपा -- भाजपा
बलिया -- भाजपा -- सपा
गाजीपुर -- बसपा -- सपा
चंदौली -- भाजपा -- सपा
वाराणसी -- भाजपा -- भाजपा
मिर्जापुर -- अपना दल (एस) -- अपना दल (एस)

राबर्टसगंज अपना दल (एस) सपा: सपा की सोशल इंजीनियरिंग सफल
जौनपुर के टीडी कॉलेज में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत त्रिवेदी का मानना है भाजपा के खराब प्रदर्शन की कई वजहें हैं। पार्टी के कार्यकर्ताओं में मायूसी, बाहरी लोगों को चुनाव लड़ाना, विरोध के बावजूद पुराने चेहरों पर दांव लगाने जैसे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण सपा की बदली रणनीति भी है। सपा ने जिस तरह से इस बार यादव और मुस्लिम का सरपरस्त होने के टैग को हटाते हुए गैर यादव ओबीसी और दलितों पर अधिक दांव लगाकर नए सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला दिया था, उसका भी असर रहा है। इसके अलावा संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने के मुद्दे को हर ओबीसी और दलितों तक पहुंचाने में भी सपा कामयाब रही है। इसका असर चुनाव परिणाम में दिख रहा है।

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