पीएम नरेंद्र मोदी ने तब कहा था कि यह सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्र गौरव का प्रतीक है। योगी ने उसी मंदिर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम से पहले जब संघ प्रमुख की मौजूदगी में मिशनरियों की भूमिका पर सवाल उठाया, घुसपैठ खत्म करने का संकल्प जताया, धर्मांतरण पर हमला बोला, सियासी लाभ के लिए देश व समाज को बांटने और बहुसंख्यकों यानी हिंदुओं के हितों पर कुठाराघात करने वालों को न बख्शने की बात की तो साफ हो गया कि सनातनी सरोकारों पर सरकार आगे ज्यादा आक्रामक दिख सकती है। महाभारत और गीता के उल्लेख के साथ योगी ने धर्म और अधर्म के संघर्ष तथा आखिर में धर्म की जीत के उल्लेख के साथ साफ कर दिया कि सरकार अपने एजेंडे को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है।