देश भर में मई महीने में जीएसटी संग्रह में सुस्ती रही और राष्ट्रीय स्तर पर इसमें तीन फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। वहीं, उत्तर प्रदेश ने इस चुनौतीपूर्ण माहौल में खुद को सबसे तेज बढ़ने वाला बड़ा राज्य साबित किया। जीएसटी ग्रोथ में पूरे देश में नंबर वन पर रहा।
राज्य के अपने कर संग्रह यानी एसजीएसटी में भी यूपी ने मजबूती दिखाई। मई 2026 में एसजीएसटी संग्रह 3,070 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 फीसदी अधिक है। यह वृद्धि दर कई बड़े राज्यों से अधिक रही। एसजीएसटी संग्रह की कुल राशि के मामले में महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात आगे रहे लेकिन वृद्धि दर के लिहाज से यूपी शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा।
जीएसटी संग्रह का एक और महत्वपूर्ण पैमाना शुद्ध जीएसटी संग्रह माना जाता है। इसमें से रिफंड घटाकर वास्तविक राजस्व देखा जाता है। इसमें भी यूपी ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। एसजीएसटी व आईजीएसटी सेटलमेंट जोड़ने और केंद्र से मिले एसजीएसटी रिफंड को घटाने के बाद यूपी का शुद्ध जीएसटी संग्रह 17,169 करोड़ रुपये रहा, जिससे प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। इस सूची में महाराष्ट्र 36,825 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर और कर्नाटक 16,177 करोड़ रुपये के साथ तीसरे नंबर पर रहा।
राज्य कर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि पहले राज्य कर विभाग की कर वृद्धि भारत सरकार की ग्रोथ के मुकाबले कम थी। इस बार जहां ऑल इंडिया ट्रेंड -3 फीसदी रहा, वहीं यूपी ने दोहरे अंकों की ग्रोथ हासिल की है। उपभोक्ता ही राज्य की बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। विभाग उन कारोबारियों पर फोकस कर रहा है, जो टैक्स दे सकते हैं। छोटे-छोटे व्यापारियों को सहूलियतें देने पर जोर है, इसीलिए नए करदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।