फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक से 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर धोखाधड़ी करने के आरोप में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में संपत्ति संबंधी कागजातों के दुरुपयोग और जालसाजी के प्रमाण मिले। मामले में आगे की जांच जारी है तथा अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक से 25 लाख रुपये का लोन लेकर हड़पने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहे थे।
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ईओडब्ल्यू के मुताबिक वर्ष 2018 में आरोपियों ने एक महिला की संपत्ति के मूल बैनामे का दुरुपयोग कर इलाहाबाद बैंक की कैसरबाग शाखा से 25 लाख रुपये की सीसी लिमिट स्वीकृत कराई थी। आरोप है कि महिला की जानकारी और सहमति के बिना फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोन लिया गया। उसके बाद अदायगी नहीं की गई। मामले में रायबरेली के बछरावां थाने में वर्ष 2020 में धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचना की धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
मामले की विवेचना बाद में उच्च न्यायालय के आदेश पर ईओडब्ल्यू को सौंपी गई थी। जांच में राजाजीपुरम निवासी अरविंद सिंह और ठाकुरगंज निवासी मोहम्मद सलीम की भूमिका सामने आई। विवेचना में दोनों को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी पाया गया।
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ईओडब्ल्यू की टीम ने मंगलवार को अरविंद सिंह को आलमबाग क्षेत्र से और मोहम्मद सलीम को ठाकुरगंज क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। ईओडब्ल्यू अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।