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यूपी: आयुर्वेद इंटर्न छात्रों का प्रदर्शन, बोले- मेहनत बराबर तो स्टाइपेंड कम क्यों; पोस्टरों में जेन-जी अंदाज

Fri, 11 Sep 2026 03:29 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

लखनऊ में आयुर्वेद इंटर्न छात्रों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने मौजूदा 7,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग रखी। उनका कहना है कि 2011 से राशि में बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि अन्य चिकित्सा इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ चुका है। छात्रों ने समान मेहनत के लिए समान स्टाइपेंड की मांग की।
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आयुर्वेद इंटर्न छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आयुर्वेद इंटर्न छात्रों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुक्रवार को हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन किया। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं जुटे। प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा 7,500 रुपये के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की।

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छात्रों का कहना है कि अब तक उनके स्टाइपेंड में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाया जा चुका है। छात्रों ने कहा कि पढ़ाई के साथ वे मरीजों के इलाज और अस्पताल से जुड़े कामों में भी जिम्मेदारी निभाते हैं। 

आयुर्वेद, होम्योपैथिक और यूनानी के करीब 400 इंटर्न डॉक्टर शामिल हुए। ये प्रदेश के 19 सरकारी कॉलेजों से आए थे। प्रदर्शन के दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने आयुष विभाग के अफसरों के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस और इंटर्न डॉक्टरों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने सभी को गाड़ी में बिठाकर ईको गार्डन भेजा।
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'करीब 250 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं'

आयुर्वेद इंटर्न डॉ. प्रखर ने कहा कि नीट पास करने के बाद छात्र इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेते हैं। साढ़े चार साल की पढ़ाई के बाद एक साल की इंटर्नशिप करनी होती है। उन्होंने कहा कि 2011 से 2026 हो गया, लेकिन स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।

छात्रों ने कहा कि कई इंटर्न किराये पर कमरा लेकर रहते हैं। मौजूदा स्टाइपेंड में किराये और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल है।  आयुष पाठ्यक्रम में एक साल की इंटर्नशिप करनी होती है। उन्हें फिलहाल 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 7500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है।

प्रदर्शनकारी इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में मौजूदा स्टाइपेंड बेहद कम है। प्रदर्शन उग्र होने पर मौके पर पुलिस पहुंची। पुलिसकर्मियों ने कुछ प्रदर्शनकारियों के पैर पकड़कर खींचते हुए गाड़ी तक ले गए। जहां उन्हें गाड़ियों में बैठाना शुरू कर दिया। 

 

बारिश के बीच छाता लेकर बैठे छात्र। - फोटो : अमर उजाला

'मेहनत बराबर तो स्टाइपेंड भी बराबर हो'

प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि उनकी मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि सम्मानजनक स्टाइपेंड की है। उन्होंने सरकार से लंबे समय से लंबित स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।
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15 साल में स्टाइपेंड में कोई संशोधन नहीं हुआ

इंटर्न डॉक्टरों का आरोप है कि पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भी चलाईं। इससे पुलिस और इंटर्न डॉक्टरों के बीच नोकझोंक हुई। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को ईको गार्डन भेज दिया। इंटर्न डॉक्टरों ने बताया कि पुलिस अफसरों ने 25 लोगों के प्रतिनिधिमंडल को आयुष विभाग के अफसरों से मुलाकात कराने को कहा। 

इस पर आयुष इंटर्न ने कहा कि कुछ दिन पहले वे वाराणसी स्थित आयुष मंत्री के निजी आवास पर जाकर ज्ञापन दे चुके हैं। अब तक कोई फैसला नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक वर्ष 2011 तक उन्हें 1928 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता था। वर्ष 2011 में इसे बढ़ाकर 7500 रुपये किया गया। इसके बाद करीब 15 साल में स्टाइपेंड में कोई संशोधन नहीं हुआ।
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