'करीब 250 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं'
आयुर्वेद इंटर्न डॉ. प्रखर ने कहा कि नीट पास करने के बाद छात्र इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेते हैं। साढ़े चार साल की पढ़ाई के बाद एक साल की इंटर्नशिप करनी होती है। उन्होंने कहा कि 2011 से 2026 हो गया, लेकिन स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
छात्रों ने कहा कि कई इंटर्न किराये पर कमरा लेकर रहते हैं। मौजूदा स्टाइपेंड में किराये और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल है। आयुष पाठ्यक्रम में एक साल की इंटर्नशिप करनी होती है। उन्हें फिलहाल 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 7500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है।
प्रदर्शनकारी इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में मौजूदा स्टाइपेंड बेहद कम है। प्रदर्शन उग्र होने पर मौके पर पुलिस पहुंची। पुलिसकर्मियों ने कुछ प्रदर्शनकारियों के पैर पकड़कर खींचते हुए गाड़ी तक ले गए। जहां उन्हें गाड़ियों में बैठाना शुरू कर दिया।
बारिश के बीच छाता लेकर बैठे छात्र।
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'मेहनत बराबर तो स्टाइपेंड भी बराबर हो'
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि उनकी मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि सम्मानजनक स्टाइपेंड की है। उन्होंने सरकार से लंबे समय से लंबित स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।
15 साल में स्टाइपेंड में कोई संशोधन नहीं हुआ
इंटर्न डॉक्टरों का आरोप है कि पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भी चलाईं। इससे पुलिस और इंटर्न डॉक्टरों के बीच नोकझोंक हुई। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को ईको गार्डन भेज दिया। इंटर्न डॉक्टरों ने बताया कि पुलिस अफसरों ने 25 लोगों के प्रतिनिधिमंडल को आयुष विभाग के अफसरों से मुलाकात कराने को कहा।
इस पर आयुष इंटर्न ने कहा कि कुछ दिन पहले वे वाराणसी स्थित आयुष मंत्री के निजी आवास पर जाकर ज्ञापन दे चुके हैं। अब तक कोई फैसला नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक वर्ष 2011 तक उन्हें 1928 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता था। वर्ष 2011 में इसे बढ़ाकर 7500 रुपये किया गया। इसके बाद करीब 15 साल में स्टाइपेंड में कोई संशोधन नहीं हुआ।