विधानसभा में उत्तर प्रदेश लोक अभिलेख विधेयक 2025 पारित हो गया। इसके बाद राज्य सरकार की अनुमति के बिना कोई भी अभिलेख प्रदेश से बाहर ले जाने पर 5 साल की सजा अथवा 50 हजार रुपये जुर्माना या दोनों से दंडित करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि यह किसी शासकीय कार्य से ले जाने पर अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी। बिना अनुमति के किसी अभिलेख को नष्ट भी नहीं किया जा सकेगा। विधेयक में सभी विभागों में अभिलेख अधिकारी की नियुक्ति करने का प्रावधान भी किया गया है, जो सामयिक महत्व के अभिलेखों की समीक्षा करके बताएगा कि उन्हें लंबे समय तक संरक्षित करने की आवश्यकता है कि नहीं। इस बाबत निदेशक अभिलेखागार से सलाह लेनी आवश्यक होगी। इसके अलावा प्रदेश सरकार अभिलेखागार सलाहकार बोर्ड का गठन भी कर सकेगी, जो लोक अभिलेखों के प्रशासन, प्रबंध, परिरक्षण और उपभोग से संबंधित मामलों में राज्य सरकार को सलाह देगा। साथ ही, प्रशिक्षण आदि के मार्गदर्शक सिद्धांत भी तय करेगा।