केशव प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव
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यूपी विधानमंडल सत्र में बुधवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और नेता प्रतिपक्ष अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच तीखी बहस हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हस्तक्षेप करना पड़ा। जिसके बाद मामला शांत हुआ।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बोल रहे थे। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा कि आप जो एक्सप्रेस वे और मेट्रो बनाने की बात करते हैं ऐसा लगता है कि जैसे आपने सैफई की जमीन बेचकर ये सारा निर्माण करवाया हो। जिस पर अखिलेश यादव बिफर पड़े और सदन में हंगामा होने लगा।
इस बीच अराजकता बढ़ती देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हस्तक्षेप किया और सदन के सदस्यों से मर्यादा बनाए रखने का अनुरोध किया।
मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर योगी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली सरकार के शासन में जिस तरह वारदात और महिला अपराध बढ़े हैं उसकी कोई कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने सिद्धार्थनगर में महिला की हत्या और चंदौली में बेटी के साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सरकार, प्रशासन और पुलिस अपराधियों के साथ खड़ी हो जाए तो पीड़ित को न्याय कैसे मिलेगा? पुलिस दबंगई करने जाती है या दबिश देने।
उन्होंने कहा कि पुलिस मामलों में कहानी बदल देती है क्या सरकार इसे स्वीकार करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अप्रैल में प्रयागराज में पूरा परिवार ही खत्म कर दिया गया लेकिन अपराधी अब तक पकड़ से बाहर हैं। रामपुर में सत्तारूढ़ दल के नेता की पुलिस थाने में पिटाई की गई है। सरकार क्या कर रही है, क्या पुलिस थाने इसी तरह अराजकता का केंद्र बन जाएंगे। क्या सरकार अपराध होने के बाद ही जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी। सरकार बताए कि अपराध रोकने की क्या व्यवस्था है
रविवार को ही प्रदेश में 19 साल की बेटी से दुष्कर्म हुआ है। सरकार को जीरो टॉलरेंस का दावा करने से पहले डायल 112, 1090 के आंकड़ों और अखबारों में छपी खबरों को देखना चाहिए। सरकार डायल 112 और 1090 के आंकड़े सार्वजनिक करे।