सपा प्रमुख अखिलेश यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ एक-दूसरे को अयोध्या सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दे रहे हैं। आइए समझते हैं कि इस सीट पर इतिहास क्या रहा है।
रामनगरी अयोध्या में सीएम योगी आदित्यनाथ और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच चुनावी चुनौती ने विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी लड़ाई को नया आयाम दे दिया है। अखिलेश ने योगी को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी तो मुख्यमंत्री ने इसे स्वीकारते हुए उन्हें भी मैदान में उतरने की चुनौती दे दी। इस जुबानी जंग के बीच पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अयोध्या सीट पर दोनों पार्टियों में कौन कितने पानी में है?
विज्ञापन
भाजपा ने 2017 और 2022 में करीब 49 फीसदी वोट हासिल कर अयोध्या सीट पर कब्जा बनाए रखा। हालांकि, भाजपा की जीत का अंतर घटने और सपा का मत प्रतिशत बढ़ने से चुनावी समीकरण अहम हो गए। वर्ष 2012 में सपा ने यह सीट जीती थी, जबकि 2017 में उसे हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2012 से 2017 के बीच भाजपा के मत प्रतिशत में 23.27 प्रतिशत वृद्धि हुई। 2022 में पार्टी का मत प्रतिशत 49 फीसदी रहा। सपा ने 2022 के चुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाकर 40.40 फीसदी कर लिया। पिछले चुनाव के मुकाबले इसमें 14.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
जीत का अंतर हुआ कम
चुनावी नतीजों में सबसे बड़ा बदलाव जीत के अंतर में दिखा। वर्ष 2017 में भाजपा प्रत्याशी 50440 वोटों से जीते थे, जबकि 2022 में यह अंतर घटकर 19990 वोट रह गया। हालांकि, भाजपा सीट पर अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रही।
विज्ञापन
2027 में अहम होंगे स्थानीय समीकरण
अयोध्या में राम मंदिर और विकास से जुड़े मुद्दों के बीच भाजपा ने मत आधार बनाए रखा। वहीं, सपा ने पिछले चुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाया। 2027 में उम्मीदवारों के चयन, स्थानीय मुद्दों, सामाजिक समीकरणों और मतदान के रुझान की भूमिका अहम होगी। सपा अयोध्या से पवन पांडेय को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। ऐसे में योगी और अखिलेश में अयोध्या को लेकर चुनौती के बीच पिछले चुनावों के आंकड़े राजनीतिक विमर्श का आधार बन सकते हैं।
Trending Videos
अयोध्या सीट पर भाजपा का वोट प्रतिशत
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला