कितना पड़ता है आर्थिक भार
यदि किसी उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन दो किलोवाट का है। उसने अप्रैल माह में 2.7, मई में 2.8 और जून में 2.9 किलोवाट बिजली खर्च किया। ऐसे में उसका भार 2.7 किलोवाट तय हो जाता है और उपभोक्ता से फिक्स चार्ज तीन किलोवाट का लिया जाता है।
उपभोक्ता से दोगुना अधिकतम मांग जुर्माना (एमडी पेनाल्टी) लिया जाता है। यानी उसका फिक्स चार्ज 330 के बजाय 440 रुपये लिए जाते हैं। सिक्योरिटी राशि भी बढ़ जाएगी। यदि किसी तरह बिजली भार कम किया गया तो एक किलोवाट भार बढ़ाने के एवज में लिए गए 220 रुपये के स्थान पर सिर्फ 170 रुपये ही कम किए जाते हैं।
47 लाख उपभोक्ताओं का बढाया गया भार
सप्ताहभर पहले अचानक लगभग 47 लाख विद्युत उपभोक्ताओं के भार बढ़ा दिए गए। इसमें लगभग 50% स्मार्ट मीटर वाले तो 50% नॉन स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ता हैं। इसे लेकर विवाद बढ़ गया है। उपभोक्ताओं की मांग है कि जिसतरह से अपने आप बिजली भार बढ़ाया गया, उसी तरह अपने आप घटाया भी जाए।
'यही वजह है कि जहां भार अधिक होता है'
निदेशक (वाणिज्य) पावर कार्पोरेशन प्रशांत वर्मा ने बताया कि किसी स्थान पर 400 केवी का ट्रांसफार्मर लगा है और वहां भार बढ़ गया तो ट्रांसफार्मर जल जाएगा। यही वजह है कि जहां भार अधिक होता है उसे बढ़ाकर फिर उसी हिसाब से संसाधन का इंतजाम किया जाता है। जब उपभोक्ता भार घटाने के लिए आवेदन देते हैं तो उसकी पड़ताल कराई जाती है। यदि मांग सही पाई गई तो भार कम भी किया जाता है। सिक्योरिटी राशि पर ब्याज भी दिया जाता है।
'सूचना देने के बाद ही बढ़ाने का नियम'
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि भार बढ़ाने के नाम पर पावर कार्पोरेशन और बिजली कंपनियां मनमानी कर रही हैं। बिना सूचना दिए सिर्फ स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं का भार बढाया जा सकता है।
अन्य को सूचना देने के बाद ही बढ़ाने का नियम है। पावर कार्पोरेशन अपने साफ्टवेयर में बदलाव करे। जिस तरह से अपने आप भार बढाया जाता है, उसी तरह से भार घटाने का भी प्रावधान हो। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
क्या है फिक्स चार्ज
- शहरी इलाके में एक किलोवाट का फिक्स चार्ज 110 रुपये।
- ग्रमीण इलाके में एक किलोवाट का फिक्स चार्ज 90 रुपये।
- बीपीएल कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं का फिक्स चार्ज 50 रुपये।