दलालों से सांठगांठ कर होती है वसूली
ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर वाहनों से जुड़े हर काम के लिए सरकारी फीस के अतिरिक्त सेवा शुल्क तय है। दलाल आवेदकों की फाइलें लाते हैं और अधिकारी उन्हें निपटाते हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं आरटीओ के पास संभाग होता है, जिससे वसूली की रकम सभी जिलों से आती है।
शहर में ओवरलोड वाहनों की एंट्री पर प्रति वाहन 4000 से 5000 रुपये वसूले जाते हैं। इसके अतिरिक्त ओवरलोड वाहनों और प्राइवेट डग्गामार बसों से महीनेवार 25 से 30 हजार रुपये वसूले जाते हैं। अकेले लखनऊ में ही 263 ऐसे वाहनों की सूची है, जिनसे प्रतिमाह वसूली होती है। आरटीओ प्रतिमाह 35 से 40 लाख रुपये, एआरटीओ 25 से 30 लाख रुपये और आरआई 20 से 25 लाख रुपये की ऊपरी कमाई करते हैं।