मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए बगैर उत्तर प्रदेश पुलिस मृतकों के परिजनों को नगद रुपये दे रही है। इसके जरिए अपनी करतूतों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। पूर्व मंत्री अजय राय ने दावा किया कि झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी के सुंदर नगर के रहने वाले शिवराज गुप्ता की प्रयागराज कुंभ में मौनी अमावस्या के दिन मृत्यू हुई थी। उनका नाम मृतकों की सूची में नहीं था। ना ही प्रदेश सरकार ने उनका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया है। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश पुलिस उनके आवास पर पहुंची और आश्रितों को पांच लाख रुपये का नकद मुआवजा दी। जब शिवराज गुप्ता के पुत्र शिवम ने पांच लाख रुपये लेने से इनकार कर दिया। कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मुआवजा 25 लाख रुपये घोषित किया था। नकदी में बिना कागजी प्रक्रिया पूरी किए यह मुआवजा क्यों दिया जा रहा है? जबकि झारखण्ड के स्थानीय अधिकारियों द्वारा ऐसी किसी भी कार्यवाही से अनभिज्ञता जताई है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने दावा किया कि उनके पास ऐसी भी जानकारी आई है कि पश्चिम बंगाल के भी दो परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये नकद दिए गए हैं। वहां भी स्थानीय अधिकारियों द्वारा इस संबंध में अनभिज्ञता जताई गई है। उन्होंने कहा कि यह कार्यवाही छुपा कर क्यों की जा रही है? घटना को लगभग 2 महीने के करीब बीत चुके हैं। मगर अभी तक ना मृतकों की सही सूची और ना ही लापता की सूची जारी नहीं की गई है। बिना दूसरे राज्य की सरकार को विश्वास में लिए पुलिस द्वारा नकद पैसा भेज कर क्या छुपाने की कोशिश की जा रही है? उन्होंने कहा कि नकद में कम मुआवजा देकर क्या कोई नया घोटाला किया जा रहा है?