राजधानी लखनऊ व आसपास के इलाकों में दीवाली के बाद हवा में प्रदूषण का काफी ज्यादा बढ़ गया है। सोमवार व मंगलवार की रात आतिशबाजी के बाद शहर की वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गई। बुधवार को लखनऊ का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 419 दर्ज किया गया। जो कि बेहद घातक की श्रेणी में आता है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर का प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सांस संबंधी दिक्कतों, आंखों में जलन, सिरदर्द और हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकता है। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। वहीं, ये भी कहा है कि बाहर निकलने पर मास्क पहनने की सलाह भी दी है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदूषण का मुख्य कारण पटाखों का धुआं, वाहनों का उत्सर्जन और मौसम में ठंड के कारण धुंध का जमाव है। उन्होंने लोगों से अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचने, बुजुर्गों को बाहर निकलने पर मास्क पहनने की सलाह दी।
वर्ष एक्यूआई श्रेणी
2021 278 खराब
2022 246 खराब
2023 213 खराब
2024 306 बहुत खराब
2025 419 गंभीर/घातक
2025 में प्रदूषण का स्तर 2024 के मुकाबले लगभग 37% अधिक रहा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तेज बढ़ोतरी सिर्फ आतिशबाजी से नहीं, बल्कि वाहन उत्सर्जन और ठंडी, स्थिर हवा के कारण भी हुई।
पीएम 10 और पीएम 2.5 की खतरनाक स्तर पर
लखनऊ के गोमतीनगर, अलीगंज, लालबाग और चारबाग क्षेत्रों में पीएम 10 का स्तर 420 और पीएम 2.5 का स्तर 280 तक दर्ज किया गया जो सुरक्षित सीमा से चार से छह गुना ज्यादा है।
पूरे यूपी में दमघोंटू हालात
गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के जिलों में भी एक्यूआई 400 के आसपास दर्ज किया गया। एनसीआर में हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सर्दी बढ़ने और हवा की गति घटने से स्थिति आने वाले दिनों में और गंभीर हो सकती है।