अखिलेश यादव और प्रशांत किशोर।
- फोटो : अमर उजाला।
ध्यान देने की बात यह है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस को मिले कुल मतों में 32.17 लाख का ही अंतर है। यानी, तृणमूल कांग्रेस की हार में एसआईआर में कटे वोटों की अच्छी खासी भूमिका रही। तृणमूल कांग्रेस एसआईआर के दौरान कई बार सड़कों पर उतरी, जबकि सपा ने पूरा ध्यान नोटिस की प्रक्रिया और नाम काटने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-7 पर केंद्रित किया।
राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस ने राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक की सलाह पर अपने 74 सिटिंग विधायकों के टिकट काटे और फर्म के कहने पर जिन 74 नए प्रत्याशी उतारे, वे करीब-करीब सभी चुनावी युद्ध में हार गए। इसलिए सपा ने परिणाम सामने आते ही आई-पैक से अपना करार खत्म कर लिया और अपनी रणनीति को परंपरागत रूप में रखने को ही बेहतर समझा।