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यूपी: ममता बनर्जी की हार के बाद सपा ने बदली चुनावी रणनीति, जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ बूथ पर रहेगा फोकस

Sun, 10 May 2026 08:47 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

UP Assembly elections: पश्चिम बंगाल में हुई ममता बनर्जी की हार के बाद सपा आने वाले चुनावों में बदली रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरती हुई दिखेगी।
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सपा ने शुरू की अपनी चुनावी तैयारियां। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 सपा ने अंदरखाने पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों से कई अहम सबक लिए हैं। राजनीतिक परामर्श फर्म के पेड वर्कर्स से ज्यादा राजनीतिक कार्यकर्ताओं से काम लिया जाएगा। वहीं, किसी भी मुद्दे पर आंदोलन से ज्यादा मतदाता सूची पर निगाह रखी जाएगी। सपा को आशंका है कि भाजपा मौका मिलते ही मतदाता सूची में खेल कर सकती है। अगर इन बातों पर ध्यान नहीं दिया तो सपा के लिए यह नुकसानदेह साबित होगा।

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सपा के रणनीतिकार मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित पार्टी का काम तृणमूल कांग्रेस ने पूरी तरह से आई-पैक संस्था को सौंप दिया था। जबकि, यूपी में सपा ने इस काम में अपने कार्यकर्ताओं को पीडीए प्रहरी बनाकर लगाया। अंतर साफ दिखा कि फाइनल मतदाता सूची में तार्किक गलती और संदिग्ध श्रेणी के कारण पश्चिम बंगाल में 27.16 लाख वोट कटे, जबकि यूपी में नोटिस पाने वाले 3.26 करोड़ मतदाताओं में से सिर्फ 3.50 लाख का ही नाम मतदाता सूची से डिलीट हुआ।

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एसआईआर पर भी रहेगा फोकस 

अखिलेश यादव और प्रशांत किशोर। - फोटो : अमर उजाला।
ध्यान देने की बात यह है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस को मिले कुल मतों में 32.17 लाख का ही अंतर है। यानी, तृणमूल कांग्रेस की हार में एसआईआर में कटे वोटों की अच्छी खासी भूमिका रही। तृणमूल कांग्रेस एसआईआर के दौरान कई बार सड़कों पर उतरी, जबकि सपा ने पूरा ध्यान नोटिस की प्रक्रिया और नाम काटने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-7 पर केंद्रित किया।

राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस ने राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक की सलाह पर अपने 74 सिटिंग विधायकों के टिकट काटे और फर्म के कहने पर जिन 74 नए प्रत्याशी उतारे, वे करीब-करीब सभी चुनावी युद्ध में हार गए। इसलिए सपा ने परिणाम सामने आते ही आई-पैक से अपना करार खत्म कर लिया और अपनी रणनीति को परंपरागत रूप में रखने को ही बेहतर समझा।
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