एक शिक्षक के भरोसे चल रहे सवा लाख स्कूल
आप सांसद ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज देश के 1.20 लाख सरकारी स्कूलों की हालत यह है कि वहां पूरी व्यवस्था मात्र एक शिक्षक के भरोसे टिकी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक अकेला शिक्षक पांच कक्षाओं के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकता है? शिक्षा व्यवस्था को आईसीयू में पहुंचाकर सरकार अब उच्च शिक्षण संस्थानों को ध्वस्त करने का जश्न मना रही है, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए शर्मनाक है।
टॉयलेट की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
संजय सिंह ने महिला सशक्तिकरण के दावों की पोल खोलते हुए कहा कि देश के 98 हजार स्कूलों में आज भी बच्चियों के लिए टॉयलेट का इंतजाम नहीं है। उन्होंने कहा कि "बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ" का नारा देने वाली सरकार जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं करा पा रही है। जब स्कूलों में मूलभूत ढांचे का अभाव है, तब सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ विपक्षी नेताओं द्वारा बनवाए गए संस्थानों को नष्ट करने पर लगा हुआ है।
पेपर लीक और संस्थानों के बंद होने पर जश्न मना रहे
संजय सिंह ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि यहां पेपर लीक होने और जम्मू मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों के बंद होने पर भी जश्न मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि अब जब जौहर विश्वविद्यालय को तोड़ने का आदेश हुआ है, तो ये लोग फिर से लड्डू बांटेंगे और नाचेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ किए जा रहे खिलवाड़ के लिए इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।