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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: फाइनल रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी SIT, यूपी सरकार से मांगा और समय

Fri, 17 Jul 2026 02:28 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच कर रही एसआईटी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांग सकती है। जांच में मिले नए सुरागों और विभिन्न पहलुओं के सत्यापन के बीच सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में अंतरिम रिपोर्ट पेश किए जाने की संभावना है, जिसमें अब तक की जांच प्रगति का विवरण रहेगा।
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राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सूत्रों के अनुसार, शीर्ष अदालत के निर्देश के अनुपालन में यह रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी। 

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बताया जा रहा है कि एसआईटी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से अतिरिक्त समय भी मांग सकती है, क्योंकि मामले के कई अहम पहलुओं की जांच अभी जारी है। जांच दल ने अब तक चढ़ावा गणना व्यवस्था, कथित वित्तीय अनियमितताओं, बैंकिंग लेनदेन, आरोपियों की भूमिका और संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल की है। 

हाल में कस्टडी रिमांड के दौरान हुई पूछताछ और बरामदगी से मिले नए सुरागों का भी सत्यापन किया जा रहा है। इन सभी बिंदुओं पर जांच पूरी होने के बाद एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करेगी।

23 जून को सौंपी थी पहली रिपोर्ट

राम मंदिर की व्यवस्थाओं और दानराशि प्रबंधन की जांच कर रही एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी जांच में राम मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़ी पांच बड़ी खामियां मिली हैं। 

जांच के दौरान मंदिर की प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन व्यवस्था से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में दानराशि की सुरक्षा से लेकर नियुक्तियों, खरीद प्रक्रिया और प्रसाद वितरण व्यवस्था तक कई बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं।

जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे को मंदिर परिसर से बैंक तक पहुंचाने तथा गणना कक्ष में उसकी गिनती की प्रक्रिया में पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं थी। यही कारण है कि दानराशि प्रबंधन को लेकर कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता महसूस की गई।

व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं मिली

एसआईटी ने यह भी पाया था कि श्रद्धालुओं की ओर से भेंट किए गए सोने और चांदी के आभूषणों का समुचित अभिलेखीकरण नहीं किया जा रहा था। ऐसे कई मामलों का उल्लेख किया गया है, जहां मूल्यवान धातुओं के संग्रहण और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं मिली।

रिपोर्ट में मंदिर की विभिन्न नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच में सामने आया कि कई पदों पर नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता मानकों के बजाय सिफारिशों के आधार पर की गईं। इससे प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही प्रभावित होने की बात कही गई है। 

 

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इस आधार पर कार्रवाई तय

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने इन सभी बिंदुओं पर सुधारात्मक कदम उठाने, जवाबदेही तय करने और वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की सिफारिश की है। शासन स्तर पर रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

प्रसाद वितरण में भी मिली खामियां

सामग्री खरीद की प्रक्रिया को लेकर भी एसआईटी ने आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कई मामलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी। कुछ खरीद मामलों में कमीशनखोरी और निर्धारित प्रक्रिया के पालन न होने के संकेत भी मिले हैं। 

इसके अलावा प्रसाद वितरण और सीता रसोई के संचालन में भी कई खामियां सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि खाद्य सामग्री और अन्य सामानों की खरीद कई बार बाजार दर से काफी अधिक कीमत पर की गई। इससे वित्तीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं।

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