प्रदेश के हवाईअड्डों के विकास, संचालन व प्रबंधन की जिम्मेदारी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को देने का प्रस्ताव था। पहले चरण में अलीगढ़, अयोध्या, चित्रकूट, मुरादाबाद, म्योरपुर (सोनभद्र) व श्रावस्ती हवाईअड्डों का प्रबंधन सौंपने की योजना थी।
प्रदेश सरकार ने राज्य में स्थित हवाईअड्डों के विकास, संचालन व प्रबंधन का काम भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) से कराने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। प्राधिकरण के प्रस्ताव पर सहमति न बनने की वजह से अब ज्वाइंट बेंचर बनाकर यह काम आगे बढ़ाने का फैसला हुआ है।
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शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश के हवाईअड्डों के विकास, संचालन व प्रबंधन की जिम्मेदारी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को देने का प्रस्ताव था। पहले चरण में अलीगढ़, अयोध्या, चित्रकूट, मुरादाबाद, म्योरपुर (सोनभद्र) व श्रावस्ती हवाईअड्डों का प्रबंधन सौंपने की योजना थी। दूसरे चरण में, अंधऊ (गाजीपुर) तथा आजमगढ़ हवाईअड्डे का प्रस्ताव था। प्राधिकरण ने दोनों ही चरण से संबंधित इन हवाईअड्डों के भूमि एवं परिसंपत्ति हस्तांतरण के संबंध में एमओयू ड्राफ्ट शासन को भेजा था, जिसके विभिन्न बिंदु कई विभागों से संबंधित थे।
अधिकारी के मुताबिकप्राधिकरण के एमओयू प्रस्ताव को निर्णय के लिए पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखा गया। उनके सामने पूरे तथ्यों का प्रजेंटेशन हुआ। मुख्यमंत्री व संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श में प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराए गए एमओयू ड्राफ्ट की शर्तों पर सहमति नहीं बन पाई और दो महत्वपूर्ण फैसले किए गए। पहला, प्राधिकरण व यूपी सरकार द्वारा ज्वाइंट वेंचर बनाकर हवाईअड्डों का संचालन व प्रबंधन किया जाए।
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इस संबंध में भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण को राज्य सरकार की ओर से प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया। दूसरा, प्रदेश में विकसित किए जा रहे हवाईअड्डों का संचालन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर करने के लिए प्रयास किया जाए। इसके लिए कंसल्टेंट का चयन कर ‘टेक्नो इकोनॉमिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट’ प्राप्त कर युक्तिसंगत निर्णय लिया जाए। अब इस फैसले पर अमल के लिए संबंधित विभागों व अधिकारियों को दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं।