उत्तर प्रदेश में किसान खतौनी में आधार कार्ड के अनुसार नाम का संशोधन करवा सकेंगे। राजस्व परिषद जल्द ही यह सुविधा देने जा रहा है। इससे प्रदेश के करीब तीन करोड़ किसानों को लाभ होगा। नाम का मिलान न हो पाने के चलते किसान सम्मान निधि से वंचित किसानों को भी लाभ मिलेगा।
प्रदेश में इन दिनों खतौनी (भूमि का राजस्व रिकॉर्ड) को आधार से लिंक करने का काम चल रहा है। इसमें तमाम किसानों का नाम खतौनी और आधार कार्ड में अलग-अलग होने से बड़ी दिक्कतें आ रहीं हैं। इससे किसानों को उन सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी मुश्किलें आती हैं, जिनमें खतौनी लगाना अनिवार्य होता है।
इसे देखते हुए राजस्व परिषद ने निर्णय लिया है कि किसानों को आधार के अनुसार खतौनी में अपना नाम दर्ज करवाने की सुविधा दी जाएगी। हालांकि, इसके लिए लेखपाल या अन्य संबंधित राजस्व कर्मी को यह रिपोर्ट लगानी होगी कि खतौनी और आधार में दर्ज नाम एक ही व्यक्ति के हैं।
राजस्व परिषद के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, अगले दो महीने में यह सुविधा देने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वहीं, राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार ने बताया कि आधार वाला नाम ही खतौनी में हो, इसके लिए हम खतौनी में नाम संशोधन की सुविधा देने पर विचार कर रहे हैं।
किसानों को ई-केवाईसी में नहीं आएगी दिक्कत
प्रदेश में किसान सम्मान निधि योजना का लाभ पाने वाले 2 करोड़ 34 लाख 61 हजार 696 किसान हैं, लेकिन इस बार 2 करोड़ 15 लाख 71 हजार 323 किसानों के खातों में ही सम्मान निधि भेजी गई। 1890373 किसानों के खातों में राशि नहीं गई।
इसकी एक वजह ई-केवाईसी का न होना भी बताया जा रहा है। दरअसल, ई-केवाईसी के लिए खतौनी और आधार के नाम में मिलान होना जरूरी है। आधार के अनुसार खतौनी में नाम परिवर्तन की सुविधा मिलने पर यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
किसके नाम कितनी जमीन का भी पता लगेगा
सभी गाटा संख्या आधार से जुड़ने पर यह आसानी से पता चल सकेगा कि किस व्यक्ति के नाम पर यूपी के विभिन्न जिलों में कुल कितनी जमीन है। अभी तक यह रिकॉर्ड सिर्फ तहसील स्तर का ही होता है।
यहां बता दें कि सीलिंग एक्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में किसी भी एक व्यक्ति के नाम सिंचित भूमि 18 एकड़ और असिंचित भूमि 27 एकड़ से अधिक नहीं हो सकती है। बाग और ऊसर भूमि के लिए यह सीमा 45 एकड़ है। उससे ज्यादा जमीन होने पर इसे सरकार में निहित किए जाने का प्रावधान है।