फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP : बिजली की दरों को लेकर अगले महीने हो सकता है कोई फैसला, गेंद नियामक आयोग के पाले में

Mon, 12 May 2025 12:06 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

खास बात यह है कि इस बार बिजली दर को लेकर कंपनियों ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। दर बढ़ाने अथवा घटाने का फैसला पूरी तरह से नियामक आयोग पर छोड़ा है।
विज्ञापन
बिजली - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश में बिजली दर निर्धारण के लिए जून माह में सुनवाई होगी। नियामक आयोग ने पाॅवर काॅर्पोरेशन की ओर से सभी बिजली कंपनियों के लिए दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) को स्वीकार कर लिया है। खास बात यह है कि इस बार बिजली दर को लेकर कंपनियों ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। दर बढ़ाने अथवा घटाने का फैसला पूरी तरह से नियामक आयोग पर छोड़ा है।

विज्ञापन


विद्युत नियामक आयोग ने पूर्वांचल, दक्षिणांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल, केस्को व नोएडा पावर कंपनी के वर्ष 2025-26 के लिए एआरआर सहित ट्रू-अप 2023-24 व वार्षिक प्रदर्शन समीक्षा वर्ष 2024 -25 को स्वीकार कर लिया है। विद्युत नियामक आयोग ने अपने आदेश में लिखा है कि मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 के तहत बिजली कंपनियों की तरफ से कोई भी बिजली दर का प्रस्ताव नहीं दाखिल किया गया है। कंपनियों की ओर से सभी डाटा तीन दिन के अंदर सार्वजनिक करने होंगे।

उपभोक्ताओं को 21 दिन में अपनी आपत्ति व सुझाव देने होंगे। आयोग जून 2025 से आम जनता के बीच सुनवाई शुरू करेगा। पूर्वांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल, मध्यांचल, केस्को की कुल वार्षिक राजस्व आवश्यकता लगभग एक लाख 13923 करोड़ है। सभी बिजली कंपनियां करीब 133779 मिलियन यूनिट बिजली बेचेंगी। बिजली कंपनियाें द्वारा वार्षिक राजस्व आवश्यकता में मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन के तहत लाइन हानियां व एटीएंडसी हानियां का कोई भी आंकड़ा अभी तक फाइल नहीं किया गया है। वहीं कुल गैप लगभग 9 से 10 हजार करोड़ के बीच है।
विज्ञापन


उपभोक्ताओं का 33122 करोड़ लौटाएं कंपनियां: वर्मा
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि नियमानुसार बिजली दर इस वर्ष भी नहीं बढ़ाई जा सकेगी। विद्युत निगमों पर उपभोक्ताओं का 33122 करोड़ रुपया बकाया चल रहा है। सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद मांग करेगा कि पहले उपभोक्ताओं का निगमों पर बकाया चल रहा 33122 करोड़ रुपया लौटाया जाए। इसे हर माह के बिजली बिल में लौटाया जाना चाहिए। ऐसे में बिजली दरें बढ़ने के बजाय घटेंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें