गोवंश संरक्षण के साथ-साथ फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने 6,199 गो संरक्षण केंद्र बनाए हैं। इनमें 9,47,698 गोवंश को संरक्षित किया गया है। कोशिश है कि स्थानीय लोगों की सहभागिता बढ़ाकर उन्हें इसके जरिए रोजगार से जोड़ा जाए।
राज्य सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक पशुपालन की योजनाओं से रोजगार सृजन एवं आर्थिक विकास को बढ़ाने का कार्य सरकार कर रही है। सीएम योगी खुद इसके लिए गंभीर हैं। इसका ही परिणाम है कि 50 हजार पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। प्रदेश में पशु चिकित्सालय की संख्या 5066 हो गई है और 11 प्रयोगशालाएं हैं।
पशुपालकों के घर तक मोबाइल वेटनरी यूनिट
विभाग की ओर से 100 दिनों की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसमें 50 हजार निराश्रित गोवंश को आश्रय मुहैया कराया जाएगा। प्रदेश में 20 बड़े गो संरक्षण केंद्र बनाए जा रहे हैं। पंचायती राज विभाग के सहयोग से 1000 अस्थायी गो सेवा बाड़ा बनाकर गोवंश को 120 दिनों तक सेवा और सुरक्षा देकर आश्रय स्थलों तक भेज दिया जाएगा। इसके साथ ही 520 मोबाइल वेटनरी यूनिट का संचालन किया जाएगा। ये यूनिट पशुपालकों के घर तक पहुंचेंगी।
विशाल भूसा संग्रहण करने वाले होंगे सम्मानित
अपर मुख्य सचिव पशुपालन डॉ. रजनीश दुबे ने सभी मंडलायुक्तों को पत्र जारी करते हुए कहा है कि बेसहारा गोवंश के भरण पोषण के लिए दान के माध्यम से भूसा बैंकों में भूसे का संग्रहण करें। इसमें दान दाताओं के अलावा विशाल संग्रह करने वाले अधिकारियों का भी शासन स्तर पर सम्मान किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव के मुताबिक 20वीं पशुगणना (2019) के अनुसार प्रदेश में 11.84 लाख गोवंश निराश्रित चिह्नित किए गए थे। उसी समय बनाई गई नीति के माध्यम से 9,47,698 को संरक्षित कर उनका भरण पोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि चित्रकूट मंडल को छोड़कर किसी भी मंडल ने भूसा संग्रहण में सही काम नहीं किया है। ऐसे में सभी मंडलों में तेजी से भूसा संग्रहण करें। 31 मई तक इसके लिए अभियान चलाया जाए। डीएम इसके लिए खुद दानदाताओं से सीधे संपर्क करें।