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UP: एकेटीयू की ठगी की तरह यूपीएफसी के पार किए गए 64.82 करोड़, दोनों गिरोह के बीच कनेक्शन की आशंका

Mon, 19 Jan 2026 09:48 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन में ठगी के मामले में बैंक की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। बैंक ने बिना किसी तस्दीक के शातिर पर कैसे भरोसा कर लिया है कि वह यूपीएफसी से अधिकृत है। 
 
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
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यूपी फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन (यूपीएफसी) की एफडी की रकम जिस तरह से फेक खाता खोलकर पार की गई ठीक उसी तरह से डेढ़ साल पहले एकेटीयू के 120 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। उस गिरोह के कई आरोपी जेल भेजे गए थे। जांच एजेंसी दोनों गिरोह के बीच कनेक्शन तलाश कर रही हैं। अंदेशा है कि बड़े पैमाने पर इस तरह की ठगी की गई है।

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दरअसल, एक शातिर खुद को बैंक अधिकारी बता एकेटीयू के अफसरों से मिला था फिर वही व्यक्ति बैंक में विवि का फाइनेंस अफसर बनकर कागजी कार्रवाई की थी। फिर फर्जी खाता खुलवाकर एफडी के 120 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे। इसी तरह यूपीएफसी में 64.82 करोड़ की ठगी को अंजाम दिया गया। यहां दीपक संजीव सुवर्णा ने खुद को यूपीएफसी का अधिकारी बन बैंक में संपर्क किया और फर्जी खाता खुलवा लिया। उसी खाते में एफडी की रकम ट्रांसफर करवाकर गबन कर लिया। फिलहाल आरोपी दीपक व उसके साथी अनीस उर्फ मनीष की तलाश में सीबीआई लगी है। गिरफ्तारी के बाद ही पता चलेगा कि किस स्तर का गिरोह है।

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सीबीआई ने जुटाए दस्तावेज
सीबीआई की तफ्तीश जारी है। सोमवार को बैंक अफसरों से टीम ने मामले से संबंधित जानकारी ली और जरूरी दस्तावेज जुटाए। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों की बैंक में मौजूदगी के फुटेज भी मिले हैं। इसके आधार पर उनकी तलाश जारी है। दोनों के मोबाइल बंद हैं। आशंका ये भी है कि कहीं आरोपियों ने अपना नाम बैंक में फर्जी तो नहीं बताया था। शायद उनके नाम भी दूसरे हों।

बैंक की भी रही लापरवाही
फर्जी खाता खुलवाकर इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करवा लेना बैंक की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करता है। बैंक ने बिना किसी तस्दीक के शातिर पर कैसे भरोसा कर लिया है कि वह यूपीएफसी से अधिकृत है। वहीं फर्जी दस्तावेजों की भी तस्दीक नहीं की। स्पष्ट है कि बैंक स्तर से बड़ी लापरवाही की गई है।

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