लखनऊ में ऑपरेशन साइबर-वज्र के तहत पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय गिरोह के नौ जालसाजों के पास से 53 हजार रुपये, 50 एटीएम कार्ड, तीन चेकबुक, दो पासबुक, कार, बाइक, टैबलेट और आईपैड बरामद हुए हैं।
साइबर ठगी के लिए म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले बड़े नेटवर्क के खिलाफ एक साथ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने रविवार को अवध के चार जिलों से 33 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ऑपरेशन साइबर-वज्र के तहत की गई कार्रवाई में लखनऊ से नौ, गोंडा से 5, सीतापुर से छह और बहराइच से 13 आरोपियों को पकड़ा गया है। जांच में अब तक 27 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है। इनमें लखनऊ के गिरोह द्वारा छह करोड़ और गोंडा के गिरोह द्वारा 21 करोड़ रुपये के लेनदेन की पुष्टि हुई है।
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लखनऊ में मड़ियांव पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय गिरोह के नौ जालसाजों के पास से 53 हजार रुपये, 50 एटीएम कार्ड, तीन चेकबुक, दो पासबुक, कार, बाइक, टैबलेट और आईपैड बरामद हुए हैं। डीसीपी उत्तरी गोपाल कृष्ण चौधरी ने बताया कि लखनऊ के कई एटीएम से म्यूल खातों में आई ठगी की रकम निकाले जाने की सूचना मिली थी।
इस आधार पर पुलिस ने फर्नीचर का काम करने वाले केशव नगर मोड़ के पास रहने वाले शाहरुख को गिरफ्तार किया। वह लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उनके एटीएम कार्ड, पासबुक अपने पास रख लेता था। बदले में खाताधारकों को पांच से 25% तक कमीशन दिया जाता था।
शाहरुख की निशानदेही पर पुलिस ने गिरोह के आठ अन्य लोगों को भी दबोच लिया। छह वर्षों से सक्रिय गिरोह खाते से रकम निकालकर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीन और अन्य देशों में बैठे साइबर अपराधियों के डिजिटल वॉलेट में भेज देता था। आरोपी टेलीग्राम और डार्कनेट के जरिये संपर्क में रहते थे। डीसीपी के अनुसार गिरोह के संचालक अब्दुल और आजम की तलाश की जा रही है।
नौकरी का झांसा देकर खुलवाते थे अकाउंट खुद चलाते थे खाता: गोंडा में पकड़े गए पांच आरोपी बेरोजगार युवाओं को सोलर कंपनी में नौकरी और 15 हजार रुपये वेतन का झांसा देकर उनके नाम पर करंट अकाउंट खुलवाते थे। खातों का नियंत्रण खुद करते थे। साइबर अपराधों की रकम के लेनदेन में इस्तेमाल इसका करते थे। वहीं, बहराइच में पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में 13 और सीतापुर से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
म्यूल अकाउंट: म्यूल अकाउंट का उपयोग साइबर अपराधी करते हैं। खाताधारक लालच या अनजाने में अपना बैंक खाता साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते हैं।