बाढ़ और जलजनित आपदाओं से निपटने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और निरंतर तैयारी जरूरी है। यह बात उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने शुक्रवार को लखनऊ कैंट स्थित सूर्य ऑडिटोरियम में आयोजित बाढ़ एवं बाढ़ संबंधी आपदा प्रबंधन विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही।
उप्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूपीएसडीएमए) और मध्य कमान की तरफ से संयुक्त रूप से आयोजित संगोष्ठी में डीजीपी ने कहा कि बाढ़ हर वर्ष जनजीवन को प्रभावित करती है और इससे निपटने के लिए सभी हितधारकों के साझा प्रयास आवश्यक हैं। डीजीपी ने बताया कि प्रदेश में पीएसी की 17 बाढ़ राहत कंपनियां (51 प्लाटून) और एसडीआरएफ की छह कंपनियां (18 टीमें) कार्यरत हैं।
करीब 2500 प्रशिक्षित जवान आपदा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए हर समय तैयार रहते हैं। प्रदेश के 44 जिलों को बाढ़ संवेदनशीलता के आधार पर चिन्हित किया गया है, जिनमें 18 अति संवेदनशील, 12 संवेदनशील और 14 सामान्य श्रेणी के जिले शामिल हैं। डीजीपी ने कहा कि जलजनित अधिकांश हादसे बाढ़ के दौरान नहीं बल्कि धार्मिक स्नान, मेलों और मूर्ति विसर्जन जैसे आयोजनों में होते हैं। इसलिए घाटों की सुरक्षा के लिए विस्तृत एसओपी लागू की गई है।
हर सुविधा उपलब्ध, अभ्यास जारी
डीजीपी ने बताया कि यूपी पुलिस की आपदा प्रबंधन नीति पांच प्रमुख स्तंभों- प्रिवेंशन, प्रिपेयर्डनेस, प्रिडिक्शन, प्रोटेक्शन और प्रॉम्प्ट रिस्पॉन्स पर आधारित है। राहत कार्यों के लिए मोटरबोट, लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, सर्च लाइट, स्कूबा डाइविंग उपकरण, अंडर-वाटर कम्युनिकेशन सिस्टम और आधुनिक एम्बुलेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही 16 मई से 30 जून तक विभिन्न नदी घाटों पर 45 दिवसीय विशेष अभ्यास भी कराया जा रहा है।