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यूपी: बिजली उत्पादन की 15 इकाइयां हुईं बंद, आ सकता है बड़ा संकट; मौसम ठंडा होने से घटी बिजली की मांग

Sat, 13 Jun 2026 10:54 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Power crisis in UP: यूपी में आने वाले दिनों में बड़ा बिजली संकट आ सकता है। अलग-अलग कारणों से प्रदेश में 15 बिजली उत्पादन इकाइयां बंद हो गई हैं। 
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यूपी की बिजली इकाइयां
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विस्तार
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प्रदेश में हुई बारिश और आंधी तूफान की वजह से बिजली की मांग करीब ढाई हजार मेगावाट कम हो गई है। अलग- अलग कारणों से 15 उत्पादन इकाइयां भी बंद हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिल पा रही है। अचानक होने वाली कटौती से उपभोक्ता परेशान हैं।
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प्रदेश में बारिश का दौर चल रहा है। यही वजह है कि दो दिन पहले जहां बिजली की मांग 31,894 मेगावाट थी। वह घटकर 29 हजार मेगावाट के करीब है। मांग में कमी के चलते लगभग 15 उत्पादन इकाइयों को आरक्षित बंद किया गया है। इसके बाद भी उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिल पा रही है। राजधानी लखनऊ सहित विभिन्न जिलों में बिजली की आंख मिचौली से उपभोक्ता परेशान हैं। ग्रामीण इलाके का बुरा हाल है। जौनपुर, सुल्तानपुर, लखीमपुर खीरी, चित्रकूट सहित तमाम जिलों के ग्रामीण इलाके में 18 के बजाय आठ से 10 घंटे ही बिजली मिल रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि तीन घंटे बिजली आती है तो एक से दो घंटे गायब रह रही है। बिजली विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इसके पीछे मूल वजह आंधी की वजह से होने वाला लोकल फाल्ट है। क्योंकि लोकल फाल्ट को ढूंढने और उसे दुरुस्त करने में वक्त लग रहा है।
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संविदा कर्मियों की तत्काल हो बहाली- वर्मा

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मांग की संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए। बिजली की कम मांग के बाद भी उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिलने की वजह समय संविदा कर्मियों का कम होना है। बारिश और आंधी-तूफान से बढ़ी खराबियों का समय पर निस्तारण नहीं हो पा रहा है। पावर कॉरपोरेशन तत्काल हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को वापस काम पर ले। निलंबित अभियंताओं को भी बहाल कर विद्युत आपूर्ति को सुचारु बनाने के काम में लगाया जाए। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन को सभी खराबियों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना चाहिए। इसके लिए फीडरवार संविदा कर्मियों की तैनाती के पूर्व निर्णय पर पुनर्विचार करना होगा। आवश्यक मानव संसाधन की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में विद्युत व्यवधानों की संख्या बढ़ सकती है। इससे प्रदेश भर के उपभोक्ताओं में असंतोष और आक्रोश बढ़ने की संभावना है।
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