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उन्नाव कांडः 'आज 8 दिन बाद बिटिया का चेहरा देखा, एक बार आंख खोल लेती तो समझते ठीक है'

Sat, 03 Aug 2019 09:31 PM IST
ishwar ashish काविश अजीज लेनिन, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : अमर उजाला
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बिटिया हमको कुछ अच्छा नहीं लगता, आज पूरे आठ दिन बाद बिटिया का चेहरा देखा, समझ नहीं आया कि वो ठीक है या नहीं। एक बार आंख खोलती तो थोड़ी तसल्ली होती। डॉक्टर की बात समझ मे नहीं आती। पता नही कब कहेगा कि बिटिया ठीक हो गयी है।

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ये दर्द उस मां का है जिसकी बेटी जिंदगी और मौत से जूझ रही है। वो हर रोज इंतजार करती है बिटिया के आंख खुलने का। उन्नाव दुष्कर्म कांड पीड़िता की मां को डॉक्टर की बात पर यकीन नहीं होता कि उसकी बिटिया ठीक है। वह कहती हैं कि डॉक्टर बताते हैं कि पहले से बेहतर है पर हम कैसे माने की वो बेहतर है? मेरी बेटी जब आंख खोलेगी तब हम कहेंगे कि बिटिया बेहतर है।

बातों-बातों में पीड़िता की मां ने बताया कि पीड़िता के चाचा के बेटे को विधायक के लोग कल (शुक्रवार) रात फिर धमकी देने गए थे। जब गुम्मा पत्थर लेकर दौड़ाया तब सब भागे। विधायक ने हमारा पूरा परिवार खत्म कर दिया। एक-एक कर सबको मार दिया, आगे भी हमारा ही नुकसान होगा। हम लड़ेंगे तो भी हमारा नुकसान होगा। नही लड़ेंगे तो भी नुकसान होगा क्योंकि हमारे पास बल नहीं है।

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'विधायक जी का क्या है, अब तक उनका कोई नुकसान नहीं हुआ'

उन्होंने आगे कहा, विधायक जी का क्या है, अब तक उनका कोई नुकसान नहीं हुआ तो अब क्या होगा। मगर बिटिया हम माखी न छोड़ेंगे, जब तक जीवन है माखी में रहेंगे, वो लोग कितना भी डरा धमका ले, हम वो जगह न छोड़ेंगे।

न्याय मिलने के सवाल पर पीड़िता की मां कहती है, हमारे देवर को जितने फर्जी केस में फंसाया है उसे उन सब से बरी कर दे बस सरकार से यही बिनती है। हमारे परिवार में उनके सिवा कोई कमाने वाला नहीं बचा है। हमारे पति को मार दिया। अब क्या वो वापस आएंगे। आगे कैसे गुजारा चलेगा कुछ समझ में नहीं आता।
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अस्पताल के खाने को लेकर की शिकायत

पीड़िता की मां अस्पताल के खाने के बारे में शिकायत करती हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में खाना बहुत खराब मिलता है। उबला खाना मिलता है। बाहर से लेने जाते हैं तो पहले पुलिस से अनुमति लो। पूछ-पूछ के जाना पड़ता है। अच्छे खाने का इंतजाम करवा दो बिटिया।

बात करते-करते उनकी आंखों में पानी आ जाता है। कहीं खो जाती हैं। खुद में बड़बड़ाती हैं, एक न्याय की लड़ाई में सब खत्म हो गया। परिवार के लोग। परिवार की खुशियां। अब तो बस अपनी बारी का इंतजार है, देखो कब हमारा नम्बर आता है। (अमर उजाला टीवी की संवाददाता काविश अजीज लेनिन से पीड़िता की मां की बातचीत)
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