घर में सारा दिन बैठे-बैठे क्या करें...। बाहर चले जाएंगे तो कहीं संक्रमित तो नहीं हो जाएंगे...। किसी के हाथ का दिया पानी पीलिया, उसने पता नहीं हाथ सैनिटाइज किया था या नहीं..। क्या होगा हमारे कॅरिअर का...। ऐसे न जाने कितने सवाल इन दिनों हर किसी को घेरे हुए हैं। खास कर हमारे किशोर और युवाओं का संवेदनशील मन इससे कहीं ज्यादा प्रभावित हो रहा है। कोविड-19 का यह दौर सीधे तौर पर इनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। ऐसी तमाम समस्याओं का समाधान तलाशने के लिए यूनिसेफ ने शुरू की है वेबिनार की एक श्रृंखला ‘जिंदगी मास्टरक्लास’। इसमें अमर उजाला मीडिया पार्टनर है। इसी कड़ी में दूसरे वेबिनार का आयोजन बुधवार को किया गया। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी भसीन और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. शाजिया वकार सिद्दीकी ने युवाओं और अभिभावकों को तनाव को जीतने का मंत्र बताया। साथ ही उनके तमाम सवालों के जवाब भी दिए। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण अमर उजाला लखनऊ के फेसबुक पेज पर भी किया गया। वेबिनार का संचालन यूनिसेफ की संगीता आनंद ने किया।
इन सवालों को लेकर विशेषज्ञ बोले - समस्या नहीं समाधान की सोचें, खुद को सकारात्मक रखें
साइकोथेरेपिस्ट डॉ. शाजिका वकार ने एक-एक कर सभी के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने मुख्य रूप से दो बातों पर जोर दिया। पहला- हमें अपने लिए एक इमरजेंसी केयर वॉल तैयार करनी होगी। यानी जब हम दुखी हों तो अपनी मनपसंद मूवी देखें, जब हमें गुस्सा आए तो शांत संगीत सुनें। अकेलापन महसूस करें तो बिना देरी किए आप बेस्ट फ्रेंड को फोन मिलाएं और बात करें। चिंता हो तो कंबल तानकर सो जाएं यानी सब कुछ छोड़ कर आराम करें। कहीं कोई संदेह लगे खुद पर तो एक लिस्ट बनाएं, उन कामों की जिसे आप अच्छे से कर सकते हैं। इसके अलावा मनपसंद किताब पढ़ें या फिर स्ट्रेस बाल लेकर बैठ जाएं। इसके अलावा चार ए हमेशा ध्यान रखें, जो चीजें तनाव दें उन्हें अवाइड करने की कोशिश करें। खुद में आत्मविश्वास है तो बदल (अल्टर) डाले हालात को अपने अनुसार, नहीं बदल सकते तो स्वीकार करें यानी एक्सेप्ट करें और अंत में उसके अनुसार अडॉप्ट कर लें यानी एवाइड, अल्टर, एक्सेप्ट और एडॉप्ट से खुद को तनाव मुक्त रखें।