लखनऊ गैंगरेप के सनसनीखेज मामले में पुलिस की ढील और गैर जिम्मेदाराना जांच प्रणाली से मृतका के परिवार वाले नाखुश हैं। यही वजह है कि परिवार के सभी सदस्य धरने पर बैठ गए हैं।
हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर हजरतगंज के गांधी प्रतिमा पर बैठे परिवार के सदस्यों की मांग है कि इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई हो और दोषियों को पकड़ा जाए।
किसके कहने पर महिला घर से बाहर निकली?
लखनऊ गैंगरेप के सनसनीखेज मामले में सरकार के सख्त रवैये के बाद आनन-फानन में किए गए खुलासे में जहां पुलिस की तफ्तीश की तमाम खामियां सामने आ रही हैं वहीं कई सवालों के पुलिस के पास अभी भी जवाब नहीं हैं।
ऐसे सवालों के जवाब में आला अफसर या तो चुप्पी साध रहे हैं या फिर जवाब देना उचित न होने के तर्क की आड़ ले रहे हैं।
केस का खुलासा करे जाने का बार-बार दावा करने वाले पुलिस अफसर अभी भी यह जवाब नहीं दे सके हैं कि आखिर राजीव या राजू नाम का कौन शख्स है, जिसके नाम से बुलाए जाने पर महिला रात में अपने घर से बाहर निकल पड़ी।
राजीव के बारे में कोई जानकारी नहीं
पुलिस का ही कहना है कि राम सेवक ने जब अजीज के सिम कार्ड से महिला के मोबाइल पर फोन किया तो उसने कहा कि क्या राजीव बोल रहे हो, जिस पर राम सेवक ने खुद को राजीव बताते हुए उससे बात की थी।
पुलिस अफसर ही कह रहे हैं कि अजीज के सिमकार्ड पर महिला व आरोपी की एक-दो नहीं बल्कि 28 बार बात हुई थी, जिसमें कई बार महिला ने खुद फोन किया था।
डीआईजी नवनीत सिकेरा ने भी माना कि कई बार महिला और आरोपी की एक घंटे तक बातचीत होती रही है। ऐसे में जिस राजीव को महिला पहले से ही जान रही थी और जिसके बुलाने पर वह देर रात अपने दोनों बच्चों को घर में अकेला छोड़ कर बाहर निकली, उस राजीव के बारे में फिलहाल पुलिस के पास कोई जानकारी नहीं है।
महिला का मोबाइल कहां है?
पुलिस का उल्टा यह कहना है कि राम सेवक ही राजीव है। वह भी यह दावा तब किया जा रहा है जबकि पुलिस इसके साथ ही यह भी कह रही है कि राम सेवक ने अजीज के सिम कार्ड का वारदात के तीन पहले से ही इस्तेमाल करना शुरू किया।
राजीव के बारे में अतिरिक्त जानकारी करने के लिए क्या महिला के सिम कार्ड की काल डिटेल निकाली गई है। इस पर अफसर चुप्पी साधे हैं।
डीआईजी ने माना कि न अजीज का मोबाइल फोन मिला न ही महिला का। उन्होंने कहा कि महिला के फोन की तलाश हो रही है। यह अपील भी की कि अगर किसी को महिला का मोबाइल मिला हो तो वह इसे पुलिस को सौंप दे।
घर से मोहनलालगंज तक कैसे पहुंची?
जहां महिला का आवास है वहां से मोहनलालगंज में उस जगह पहुंचने के लिए जहां कोई रामसेवक उसका इंतजार कर रहा था, रात में सवारी का कोई साधन नहीं मिलता है।
पुलिस का मानना है कि महिला ऑटो या टेंपो कर वहां तक पहुंची होगी।
लेकिन किस ऑटो या टेंपो से वह वहां तक पहुंची उसे तलाश करने की पुलिस ने फिलहाल जरूरत नहीं समझी है।
रामसेवक का हुलिया नहीं पहचान सकी महिला
पुलिस का कहना है कि महिला ने बाद में राम सेवक का चेहरा देखा और विरोध किया।
लेकिन इससे पहले वह राम सेवक के साथ उसकी मोटर साइकिल पर बैठ कर उससे बातचीत करती हुई रात के समय घर से दूर पहुंच गई।
पुलिस अफसरों के पास इस बात का भी जवाब नहीं है कि महिला रात में अपने किसी परिचित के साथ ही बाहर निकलने पर राजी हुई होगी और ऐसे में वह क्या मोटर साइकिल पर बैठे राम सेवक के कद-काठी और हुलिये को नहीं पहचान सकी।