गंगा बचाने को उमा भारती ने अब आंदोलन की राह पर चलने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत वह कानपुर के सरसैया घाट पर धरना देकर करेंगी।
उनकी मांग है कि गंगा को गंदा कर रही कानपुर की टेनरियों को बंद किया जाए। कानपुर के बाद उमा गंगा किनारे अन्य प्रमुख स्थानों पर धरना-प्रदर्शन करेंगी।
प्रयाग महाकुंभ के मौके पर भी उमा भारती ने प्रदेश सरकार से गंगा के जल को स्नान करने लायक बनाने के लिए कानपुर के टेनरी उद्योगों का कचरा नदी में गिराने पर रोक को लेकर अभियान चलाया था।
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जिस पर सरकार ने महाकुंभ भर के लिए टेनरियों को बंद कर दिया था। पर, बाद में टेनरियों का गंदा पानी फिर गंगा में गिरने लगा। गंगा की रक्षा को उमा भारती पिछले तीन वर्षों से अभियान चला रही हैं।
उन्होंने 2011 में गंगोत्री से गंगासागर तक यात्रा की। इसके बाद गंगासागर से गंगोत्री तक की यात्रा करके गंगा का पूरा निरीक्षण किया।
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इस दौरान उन्होंने न सिर्फ गंगा के बारे में पूरी रिपोर्ट तैयार की बल्कि गंगा के किनारे रहने वालों की समस्याओं को भी समझा। भाजपा ने उन्हें गंगा समग्र अभियान का राष्ट्रीय संयोजक भी बनाया था।
हालांकि इस समय वह इस दायित्व से मुक्त हो चुकी हैं। पर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरफ से उन्हें गंगा को लेकर ही निरंतर अभियान चलाते रहने का निर्देश दिया गया है। उसी के तहत वह रविवार को कानपुर पहुंच रही है।
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