लखनऊ। ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय में छह साल से अल्ट्रासाउंड मशीन डिब्बे में बंद है। मरीज जांच के लिए निजी केंद्र की दौड़ लगा रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी भर्ती मरीजों को झेलनी पड़ रही है। उन्हें भी निजी केंद्र जाना पड़ रहा है। यह समस्या अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के न होने से पैदा हुई है। अस्पताल प्रशासन ने कई दफा शासन को पत्र भेजकर रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की मांग की, मगर अफसरों की सेहत पर फर्क नहीं पड़ा।
ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय की ओपीडी में हर दिन करीब डेढ़ हजार से अधिक मरीज आते हैं। अस्पताल में गाइनी, ईएनटी, फिजिशियन, टीबी एंड चेस्ट, बाल रोग समेत अन्य विभाग संचालित हैं। ओपीडी में हर दिन करीब 40-50 मरीजों को डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच लिखते हैं। इसके लिए मरीजों को बलरामपुर या दूसरे सरकारी अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है, मगर मरीज दूसरे सरकारी अस्पताल के दूर होने और फिर वहां लंबी वेटिंग होने के कारण निजी केंद्र से जांच करा रहे हैं।
वर्ष 2019 से डिब्बे में बंद मशीन
अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए वर्ष 2015 में अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित हुई थी। उस समय रेडियोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश झा यहां तैनात थे। 2019 में वह सेवानिवृत्त हो गए, जिसके बाद से यहां कोई भी नए रेडियोलॉजिस्ट या सोनोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई।
इलाज अंदर, जांच बाहर करानी पड़ रही
हरदोई से आईं रेखा ने सोमवार को गाइनी यूनिट में डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने पर्चे पर कुछ दवाएं और अल्ट्रासाउंड जांच लिखी। वह रेडियोलॉजी विभाग में गईं तो पता चला कि यहां जांच काफी समय से बंद है। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच दूसरे सरकारी अस्पताल से कराने की सलाह दी। महिला ने दूसरे अस्पताल की जानकारी होने से इन्कार किया। आखिर में उन्हें निजी केंद्र में जांच करानी पड़ी।
भर्ती मरीज भी मजबूरी में करा रहे जांच
अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती मरीज रामकुमारी को पेट दर्द समेत व कई अन्य समस्या होने पर अस्पताल में भर्ती किया गया था। खून से जुड़ी जांच व दवाएं अस्पताल से मुफ्त मिल गईं। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच के लिए बलरामपुर अस्पताल रेफर किया, मगर रामकुमारी ने दूसरे अस्पताल जाने से मना कर दिया। मजबूरी में उन्होंने नजदीकी केंद्र से जांच कराई।
अफसर भी बने रहे लापरवाह
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने छह साल में मरीजों की दर्द की सुध तक नहीं ली। किसी भी डॉक्टर को सोनोलॉजिस्ट का प्रशिक्षण तक नहीं दिलाया गया, ताकि जांच शुरू हो सके। स्वास्थ्य महानिदेशालय के जरिये विशेषज्ञ न होने पर डॉक्टरों को छह-छह माह का प्रशिक्षण दिलाकर उनकी सेवाएं कई अस्पतालाें में ली जा रही हैं।
Iमशीन क्रियाशील है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से जांच बंद पड़ी है। शासन को पत्र भेजकर रेडियोलॉजिस्ट की मांग की है। अफसरों ने जल्द ही विशेषज्ञ की तैनाती कराने का आश्वासन भी दिया है।I
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- डॉ. एसपी सिंह, सीएमएसI
Iअस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट न होने के मसले को सदन में भी उठाया गया था। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से मशीन बंद है। बताया स्वास्थ्य मंत्री से वार्ता करके जल्द ही यहां पर विशेषज्ञ की तैनाती कराई जाएगी ताकि मरीजों को असुविधा न हो।I
I- डॉ. नीरज बोरा, विधायक उत्तरी विधानसभाI
Iजिन अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इसी माह के आखिर तक शासन के जरिये विशेषज्ञ अस्पतालों में तैनात किए जाएंगे, ताकि मरीजों को असुविधा न हो। I
I- डॉ. जीपी गुप्ता, अपर निदेशक लखनऊ मंडलI