यूजीसी ने खारिज किए 4600 शोध जर्नल
पुनर्वास विवि का स्थापना दिवस :
वीसी बोले- देश के सिर्फ 800 अप्रूव्ड जर्नल बचे, क्वालिटी ऑफ रिसर्च पर दें ध्यान
अच्छा काम करने वाले शिक्षक-कर्मचारियों का सम्मान
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा कृष्णपाल सिंह ने कहा है कि यूजीसी ने अपने ई-केयर पोर्टल से देशभर के 5400 में से 4600 शोध जर्नल को हटा दिया है। अब मात्र 800 एप्रूवड जर्नल बचे हैं। इन्हीं जर्नल में प्रकाशित होने वाले शोध ही एपीआई में गिने जाएंगे। ऐसे में बोगस पब्लिकेशन नहीं हो सकेगा। शिक्षक क्वालिटी ऑफ रिसर्च पर ध्यान दें ताकि आगे उन्हें प्रमोशन आदि में किसी तरह की दिक्कत न हो। वे विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
अटल बिहारी बाजपेई सभागार में आयोजित समारोह में उन्होंने शिक्षकों को यूजीसी के शोध प्रकाशन के नए नियमों की जानकारी भी दी। उन्होंने दिव्यांगों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को बदलने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता व्यक्ति की विद्वता में बाधक नहीं है। अगर दिव्यांग व्यक्ति चाहे तो कुछ भी प्राप्त कर सकता है। सूरदास, अष्टावक्र, स्टिफन हॉकिंग्स का उदाहरण देकर कहा कि दिव्यांगों ने समाज की बेहतरी के लिए भी बहुत कार्य किए हैं। मुख्य अतिथि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय सिंह ने कहा कि यूं तो राजधानी में कई विश्वविद्यालय हैं, लेकिन पुनर्वास विश्वविद्यालय लोगों को मुख्य धारा से जोड़ने का मूल काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल भाव सेवा होना चाहिए। शिक्षा से व्यक्ति के मानवीय गुणों का विकास होना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ रोजगार की प्राप्ति नहीं, बल्कि नियम व धर्म के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम में अच्छा काम करने वाले शिक्षकों-कर्मचारियों व प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को निदेशक दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, डीन प्रो. देवेंद्र नाथ सिंह, रजिस्ट्रार आदि अमित सिंह आदि ने संबोधित किया। इस अवसर पर नाटक स्वर्ग के वास्ते, वायलिन वादन और भरत नाट्यम आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी हुई।
इनका हुआ सम्मान
शिक्षक डॉ. शशि भूषण व डॉ. बृजेश रावत, कर्मचारी मनोज वैश्य व नीरज तिवारी, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले सुमन रावत, चिराग बरेठा, अबू हुबैदा, सोनजीत सिंह, चंदन मिश्रा व प्रशिक्षक गौरव खन्ना
शिक्षक ने दर्ज कराया अपना विरोध
कार्यक्रम में जैसे ही शिक्षकों के सम्मान की घोषणा की गई शिक्षक डॉ. विजय वर्मा ने इसका विरोध किया। वे सम्मान के लिए शिक्षकों के चयन में पारदर्शी प्रक्रिया न अपनाने का आरोप लगाते हुए मंच की तरफ बढ़े। जिन्हें सहयोगी शिक्षकों ने रोक लिया। डॉ. वर्मा ने कहा कि स्थापना दिवस पर अगर शिक्षकों के सम्मान की व्यवस्था थी तो इसके लिए नियमत: आवेदन लेकर, प्रक्रिया के तहत चयन किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आपत्ति के बाद भी विवि प्रशासन ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। विवि के दिव्यांग खिलाड़ी शौकत अली ने भी दिव्यांग खिलाड़ियों की उपेक्षा का आरोप लगाया। वहीं बाद में वीसी ने अपने भाषण में इस पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि आज जो सम्मान है वह किसी इंडेक्स पर नहीं बल्कि विवि के लिए अच्छा काम करने वालों का है। अच्छे शोध शिक्षकों के प्रमोशन में काम आएंगे।