लखनऊ। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय में पिछले चार साल से दो साल का पीजी पाठ्यक्रम महज डेढ़ साल में ही निपट रहा है। स्नातक पाठ्यक्रम की हालत इससे ज्यादा अलग नहीं है। हर साल यहां दाखिलों में देरी होती है। इसके बाद जैसे-तैसे पढ़ाई कराकर परीक्षा करा ली जाती है।
बीबीएयू में कोविड महामारी के समय शैक्षणिक सत्र पटरी से उतरा था। इसके बाद हर साल यहां नवंबर तक दाखिले ही होते रहते हैं। एक दिन पहले ही यहां स्नातक पाठ्यक्रमों में खाली बची सीटों के लिए स्पॉट काउंसिलिंग का कार्यक्रम जारी किया गया है। नवंबर के 15 दिन बीत जाने के बाद दाखिले होंगे तो कितने दिन इनकी पढ़ाई हो पाएगी। यूजीसी के नियमों के अनुसार, सेमेस्टर में कम से कम 90 दिन कक्षाओं का संचालन होना चाहिए।
बीबीएयू प्रशासन 90 दिन की गणना पहले चरण में हुए दाखिलों के आधार पर कर लेता है। जबकि बाद में दाखिला पाने वाले विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए मुश्किल से डेढ़ महीने का समय ही मिल पा रहा है। केजीएमयू प्रशासन इस मामले में सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बच रहा है। हालांकि प्रशासन अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर परीक्षा कराने की बात जरूर कहता है।
सीयूईटी से भी पड़ा असर
बीबीएयू का सत्र पटरी से उतरने के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) भी कम जिम्मेदार नहीं है। विवि के दाखिले सीयूईटी के माध्यम से हो रहे हैं। पहले सीयूईटी की काउंसिलिंग में देरी होने से दाखिले देर से हो पाते हैं। उसके बाद खाली बची सीटों पर स्पॉट काउंसिलिंग में लगने वाले समय की वजह से भी शैक्षणिक सत्र पिछड़ता है।
13 तक होगी काउंसिलिंग
बीबीएयू में स्नातक की खाली बची सीटों के लिए विभिन्न विषयों के लिए 13 नवंबर तक स्पॉट काउंसिलिंग होनी है। इसका पूरा ब्योरा विवि की वेबसाइट पर डाल दिया गया है। दाखिले के लिए अर्हता और शर्तें भी वेबसाइट पर मौजूद हैं। इच्छुक अभ्यर्थी दाखिले के लिए यहां अभी भी संपर्क कर सकते हैं।