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पूर्वांचल में औद्योगीकरण के लिए दो सूत्री फॉर्मूले पर मंथन

Wed, 26 Aug 2020 11:57 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार पूर्वांचल में औद्योगीकरण को प्रोत्साहन के लिए दो सूत्री रणनीति पर अमल की तैयारी कर रही है। पहला, चुनिंदा सेक्टर में बड़े उद्यमियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया जाएगा। दूसरा, एनसीआर में बड़े उद्योगों की स्थापना करने वाले निवेशकों को पूर्वांचल में एंसिलरी (सहायक) उद्योगों की स्थापना के लिए तैयार करने का प्रयास होगा।
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पूर्वांचल पिछड़ेपन का दर्द पहले से झेल रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूरों की वापसी के बाद रोजगार की चुनौती और बढ़ गई है। सरकार ने इसे ध्यान में रखकर वहां तेजी से रोजगार सृजन की कार्ययोजना पर काम शुरू किया है। इसके अंतर्गत इस क्षेत्र में औद्योगीकरण को तेज करने के लिए कई अहम सुझाव सामने आए हैं। इस क्षेत्र में स्थापित होने वाले उद्योगों को कई तरह की सहूलियतें व सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

निवेशकों को बताया जाएगा कि किस तरह पश्चिम की जगह पूरब का निवेश अब उन्हें अधिक लाभ देने वाला होगा। इस रणनीति पर अमल की जिम्मेदारी बड़े अफसरों को देकर उन्हें जवाबदेह बनाने की तैयारी है।
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 60 बड़े उद्योगों की स्थापना की कार्ययोजना पर होगा काम  ः प्रदेश सरकार चाहती है कि पूर्वांचल में ऐसे उद्योग समूहों को लाने का प्रयास किया जाए जो आईटी विकास, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि उत्पाद, लॉजिस्टिक्स, विमान संबंधी, इलेक्ट्रिक वाहन, मशीन पार्ट्स, सड़क निर्माण, कृषि मशीनरी, तेल बीज प्रसंस्करण, डाटा आधारित आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस उद्यम, बैटरी उत्पादन, इलेक्ट्रिक कारों के लिए मीटरिंग और ईंधन स्टेशन की स्थापना तथा 5जी दूरसंचार आधारित व्यवसाय में कार्यरत हों।

इन सेक्टर की कम से कम 60 इकाइयों की सूची तैयार कर उन्हें निवेश के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसमें यूनिलीवर, नेस्ले, अमेजन, पतंजलि, कमिंस, आयरन माउंटेन, वेलमार, ओलम, हैवेल्स, डच लेडी, आर्चर डेनियल मिडलैंड, ओरेकल, सेल्सफोर्स, बॉश, मित्सुबिशी, होंडा, अलीबाबा, टेनसेंट, सिस्को, वीमवेयर और इनवुट वेटेरा आदि को आकर्षित करने की योजना है।

चिह्नित निवेशकों से संपर्क व संवाद कर उनसे निवेश कराने की जिम्मेदारी अपर मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों को सौंपने का प्रस्ताव है। प्रत्येक अफसर को 3-5 निवेशकों का नाम दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री को इसकी प्रगति की नियमित सूचना देनी होगी। जानकार बताते हैं कि यह कार्ययोजना मूर्त रूप ले सकी तो पूर्वांचल में बड़ा बदलाव नजर आएगा।

 
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सहायक उद्योगों को कई सहूलियतें देने का प्रस्ताव

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कई बड़े उद्योग हैं। वहां जमीन बहुत महंगी हो रही है। प्रगति के लिए पुराने उद्योगों से भविष्य के उद्योगों में निवेश की जरूरत है। सरकार एनसीआर के निवेशकों को बताएगी कि  पूर्वांचल से एनसीआर के साथ अच्छा सड़क संपर्क, सस्ती जमीन, इंजीनियरिंग संस्थानों के कुशल श्रमिक व स्थानीय उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या उपलब्ध है। एनसीआर से एंसिलरी उद्योगों को पूर्वांचल में लाने पर कई सहूलियतें देने की योजना है। इसमें एनसीआर से पूर्वांचल के बीच उद्योग हस्तांतरण के लिए एकल खिड़की मंजूरी, 45 दिन में अनुमोदन शामिल है।

बिजली, पानी, सीवेज कनेक्शन, फैक्टरी तक सड़क तथा टेलीकॉम व ब्रॉडबैंड सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रस्ताव है कि पहले चरण में गोरखपुर, बस्ती, श्रावस्ती, कुशीनगर व संतकबीरनगर के औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में भूमि का आवंटन हो। एनसीआर में जितनी जमीन में फैक्टरी लगी थी, उसका डेढ़ गुना क्षेत्र रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाए। फैक्टरी 15 महीने में उत्पादन शुरू करे। जीएसटी में राज्य के हिस्से पर 50 प्रतिशत छूट तथा फैक्टरी में उत्पादन शुरू होने के बाद तीन वर्ष तक एनएचएआई व राज्य मार्ग पर 100 प्रतिशत टोल सब्सिडी दी जाए।
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