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यूपी के दो और अफसर मोदी सरकार में शामिल

Sun, 31 May 2015 02:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सूबे के दो और आईएएस अफसरों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती मिली है। इनमें राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव आलोक कुमार को नीति आयोग में सलाहकार और राज्य विद्युत उत्पादन निगम व यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक संजय प्रसाद को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनाया गया है।
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1993 बैच के आईएएस आलोक कुमार दिसंबर 2013 से राजस्व परिषद में तैनात हैं। केंद्र ने उन्हें नीति आयोग के सलाहकार के रूप में पांच वर्ष की तैनाती दी है। यह पद संयुक्त सचिव स्तर का है। राजस्व परिषद से पहले आलोक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सचिव थे। 2013 में उन्हें अचानक हटा दिया गया था।

बताया जाता है कि वह सचिव सीएम के पद से हटाकर राजस्व परिषद भेजने से खुश नहीं थे। उन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए तभी से प्रयास शुरू कर दिए थे। वजह, पंचम तल से हटाया गया तो कोई वजह नहीं बताई गई।
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दूसरा, पर्दे के पीछे ऐसा माहौल बनाया गया जैसे उन्होंने वहां कोई बड़ा गुनाह किया था। बावजूद इसके आलोक ने परिषद में तैनाती को सजा के तौर पर देखने वाली धारणा को तोड़ने की पहल की और इस तैनाती का परिषद के कामकाज पर असर नहीं पड़ने दिया।
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यह रहा इनका योगदान

लेखपाल संघ के महामंत्री अवधेश सिंह चौहान बताते हैं कि समीक्षा अधिकारियों की वर्षों से लंबित पदोन्नति हो या राजस्व निरीक्षक के 617 रिक्त पद भरने की कार्यवाही, कुमार के प्रयास से आगे बढ़ी। इन पदों पर इंटरव्यू हो रहा है।

राजस्व निरीक्षक से नायब तहसीलदार के पद पर पदोन्नति का प्रस्ताव भी काफी आगे बढ़ चुका है। इसके अलावा नायब तहसीलदारों की पदोन्नति, तैनाती तथा लेखपालों के 5000 व राजस्व निरीक्षकों के 1308 पद बढ़ाने के काम में बतौर सचिव उनकी भूमिका सबसे अहम रही।

जो लेखपाल भर्ती तीन साल से आगे नहीं बढ़ी थी, न सिर्फ उसके लिए वाह्य एजेंसी का चयन किया बल्कि भर्ती का कैलेंडर भी घोषित किया। राजस्व परिषद का नया रूप भी उनके खाते में जुड़ गया है।

1995 बैच के आईएएस संजय प्रसाद की गिनती भी तेज-तर्रार अफसरों में होती है। कई जिलों में कलेक्टर व फैजाबाद के कमिश्नर रहे संजय पिछले कुछ समय से राज्य विद्युत उत्पादन निगम व ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन के एमडी हैं।

संजय को भी विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में पांच साल की तैनाती मिली है। ये अधिकारी प्रदेश से कार्यमुक्त होने के बाद प्रतिनियुक्ति के लिए जाएंगे।
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