लखनऊ। केजीएमयू प्रशासन ने अनुशासनहीनता और लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में एक विभागाध्यक्ष समेत दो डॉक्टरों को दोषी पाते हुए दंडित करने का निर्णय लिया गया।
जांच में एक विभागाध्यक्ष पर ठाकुरगंज स्थित निजी अस्पताल में प्रैक्टिस करने के आरोप सही पाए गए। एक मरीज की मौत के बाद तीमारदारों ने विभागाध्यक्ष के वीडियो और साक्ष्य विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपे थे। दोष सिद्ध होने पर कार्यपरिषद ने विभागाध्यक्ष की दो वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का आदेश दिया है।
एक अन्य मामले में, मरीजों को बाहर की दवा लिखने के गंभीर आरोपों में घिरे एक डॉक्टर को भी दोषी पाया गया। जांच समिति की संस्तुति के आधार पर कार्यपरिषद ने संबंधित डॉक्टर को चार्जशीट जारी करने का फैसला किया है।
साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति के अवकाश और जॉइनिंग से जुड़ा विवाद अब राजभवन तय करेगा। तीन साल के अवकाश के बाद कार्यकाल विस्तार और फिर नियमानुसार आवेदन न करने के कारण उनकी जॉइनिंग पिछले तीन महीनों से लटकी हुई थी। कार्यपरिषद ने अब इस प्रकरण को अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल/कुलाधिपति के सुपुर्द कर दिया है।