वर्ष 2005 में नीलमथा इलाके में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात माफिया रमेश कालिया के दो साथियों विश्वनाथ और राजेश कुमार सिंह को जानलेवा हमले के आरोपों से बरी कर दिया गया। एडीजे उमाकांत जिंदल ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। वहीं, पुलिस विवेचना में कई गंभीर खामियां है, जिनके चलते दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ मिला।
पुलिस ने इस बहुचर्चित मुठभेड़ में विश्वनाथ और राजेश कुमार सिंह को पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाकर चार्जशीट दायर की थी। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में जिन लोगों को गवाह बनाया था उन्होंने कोर्ट में दिए बयानों में पुलिस की कहानी का समर्थन नहीं किया। अदालत ने फैसले में पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान विरोधाभासी थे और किसी ने भी आरोपी को घटना से जोड़ने वाला ठोस सबूत नहीं दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस ने बताया था कि आरोपियों का आपराधिक इतिहास है, लेकिन कोर्ट में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किया गया।
यह है मामला
पत्रावली के अनुसार इम्तियाज अली ने 12 फरवरी 2005 को तत्कालीन एसएसपी से मुलाकात की और बताया कि माफिया रमेश कालिया उनसे एक लाख रुपये गुंडा टैक्स मांग रहा है। आरोपी ने उसे नीलमथा स्थित निर्माणाधीन मकान पर बुलाया है। इस पर एसएसपी ने चिनहट के तत्कालीन थाना प्रभारी एसकेएस प्रताप और गाजीपुर के थानाध्यक्ष विनय गौतम को लगाया। दोनों अधिकारियों ने टीम बनाई और टीम को बरात की तरह लेकर गए और इम्तियाज अली के साथ नीलमथा पहुंचे। वहां टीम ने देखा की रमेश कालिया ने नोटों की गड्डी इम्तियाज के चेहरे पर फेंकी और गालियां देते हुए पिस्टल लोड करने लगा। इस पर पुलिस ने रमेश कालिया को पकड़ने का प्रयास किया, जिसमें दोनों तरफ से गोलीबारी हुई। इस में रमेश कालिया मारा गया, जबकि घायल विश्वनाथ को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद पुलिस ने रमेश कालिया और उसके साथियों के खिलाफ कैंट थाने में जानलेवा हमला कराने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने विश्वनाथ यादव और राजेश कुमार सिंह के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।