एटीएस के वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी ने आरोपी अक्षय सैनी और राजीव तिवारी को 12 दिन के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड पर दिए जाने की अर्जी दी। बताया गया कि वाराणसी एटीएस के इंस्पेक्टर भारत भूषण तिवारी ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि उन्हें सूचना मिली कि आजमगढ़, गोरखपुर, सहारनपुर, मऊ, औरैया, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, कोलकाता, दिल्ली एनसीआर, बिहार के लखीसराय और कटिहार के कुछ जनसेवा केंद्र पर फर्जीवाड़ा हो रहा है।
एटीएस ने जांच की तो पता चला कि फर्जीवाड़े में गोरखपुर का राजीव तिवारी, आजमगढ़ का मोहम्मद नसीम, मोहम्मद साकिब, हिमांशु राय, सहारनपुर का अक्षय सैनी, मारुफ, गाजियाबाद का सलमान अंसारी, औरैया का गौरव कुमार गौतम, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का मोहम्मद सद्दाम हुसैन और कोलकाता का अंसार मौला शामिल हैं। एटीएस ने 21 अगस्त को आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
संदिग्ध लेन-देन की जांच करेगी एटीएस
अर्जी में कहा गया कि आरोपी अक्षय सैनी और राजीव तिवारी को रिमांड पर लेकर उनके पास से बरामद लैपटॉप व मोबाइल के डेटा के संबंध में उनसे जानकारी ली जाएगी। आरोपियों के बैंक खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन के संबंध में पूछताछ करनी है। कहा गया कि आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड बनाने के लिए जिन जनसेवा केंद्रों का इस्तेमाल किया है उनके संचालकों के बारे में पूछताछ की जाएगी।
फर्जी फिंगर क्लोन भी किए थे तैयार
बताया गया कि आरोपियों ने दूसरे राज्यों के ऑपरेटरों की आईडी का गलत तरीके से इस्तेमाल किया। इसके बाद अपने लैपटॉप पर फर्जी आधार बनाए। इनकी जानकारी के अलावा जिन स्थानों पर आईरिस क्लोन और फिंगर क्लोन तैयार किए गए हैं उनके बारे में भी पूछताछ की जाएगी। एटीएस की ओर से कहा गया कि आरोपियों ने अपने बयान में बताया कि उन्होंने जिन लोगों के फर्जी दस्तावेज के जरिये आधार कार्ड तैयार किए हैं उनके नाम एक रजिस्टर में दर्ज हैं। एटीएस उस रजिस्टर को बरामद करेगी।