प्रवेंद्र गुप्ता
लखनऊ। जलकल विभाग के 607 नलकूप और सीवेज पंपिंग स्टेशन अब सौर ऊर्जा से चलाए जाएंगे। इससे बिजली खर्च 39 प्रतिशत कम होगा और सालाना 19 करोड़ 48 लाख 75 हजार रुपये की बचत होगी। साथ ही 21679.89 टन कार्बन का उत्सर्जन भी कम होगा।
अमृत मिशन योजना के तहत जलकल के नलकूपों को बिजली के बजाय सौर ऊर्जा से चलाने पर जोर दिया जा रहा है। शासन की ओर से भी शहर को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें नई ऊर्जा के उपयोग के साथ ऊर्जा संरक्षण पर जोर देकर कार्बन उत्सर्जन को कम किया जाना है। इसे लेकर वर्ष 2017 में ईईएसएल ने शहर में जलकल विभाग के नलकूप और सीवेज पंपिंग स्टेशनों का इन्वेस्टमेंट ग्रेड एनर्जी ऑडिट कराया था। इसमें सामने आया था कि यदि सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा तो बिजली खर्च 39 प्रतिशत कम हो जाएगा।
नगर आयुक्त को रिपोर्ट भेज बताए लाभ
यूपी नेडा के निदेशक अनुपम शुक्ला ने जलकल के नलकूप व सीवेज पंपिंग स्टेशन सौर ऊर्जा से चलाने से होने वाले फायदों को लेकर नगर आयुक्त को रिपोर्ट भेजी है। इसमें बताया कि ऐसा करने पर सालाना 243.59 लाख यूनिट बिजली बचेगी। यह कुल खर्च का करीब 39 प्रतिशत है। साथ ही बिजली लोड भी 3475.95 किलोवाट कम हो जाएगा, जिससे 19.48 करोड़ रुपये की बचत होगी। वहीं, सौर ऊर्जा से संचालन शुरू होने व बिजली लोड कम होने से सालाना 21679.89 टन कार्बन का उत्सर्जन भी कम होगा। प्रोजेक्ट का खर्च भी यूपीनेडा उठाएगा।
सौर ऊर्जा से चलता है तीसरा जलकल
इंदिरा और गोमतीनगर की करीब पांच लाख आबादी को पीने के पानी की आपूर्ति करने वाला तीसरा जलकल सौर ऊर्जा से ही चलता है। इससे यहां बिजली खर्च शून्य है। जलकल के महाप्रबंधक रामकैलाश ने बताया कि तीसरा जलकल 80 एमएलडी क्षमता का है। पहले इस पर महीने का बिजली खर्च सात लाख रुपये था। वहीं, बचने वाली बिजली गऊघाट पंपिंग स्टेशन पर उपयोग में ले ली जाती है। जलकल के महाप्रबंधक रामकैलाश गुप्ता ने बताया कि नलकूपों के अलावा सीवेज पंपिंग स्टेशनों को सौर ऊर्जा में बदला जाना है। इससे बिजली खर्च कम होगा। यूपीनेडा के प्रस्ताव पर काम होगा।