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साजिश के तहत लगाई गई पत्रकारपुरम सब्जी मंडी में आग

Mon, 28 Mar 2016 01:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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पत्रकारपुरम सब्जी मंडी में भीषण आग लग गई थी - फोटो : amar ujala
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पत्रकारपुरम चौराहे की सब्जी मंडी में साजिश के तहत आग लगाई गई थी। इसे लेकर पीड़ित दुकानदारों में आक्रोश है। उन्होंने पुलिस से दोषियों को चिह्नित कर कार्रवाई की मांग की है।
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इस मामले में आदर्श सोसाइटी के अध्यक्ष इंद्रपाल ने गोमतीनगर थाने में अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया है।

इंद्रपाल के मुताबिक, विजयश्री कॉम्पलेक्स की छत से आरोपियों ने उनकी दुकानों की छत पर चिन्गारी फेंकी। इससे आग लगी।

इंद्रपाल का आरोप है कि गरीबों को भगाने के लिए कई साल से साजिश रची जा रही है। यह चौथी बार है जब संदिग्ध हालात में आग लगी है। जबकि प्लॉट खाली कराने का मामला कोर्ट में है।

वहीं, एसओ गोमतीनगर अखिलेश चंद्र पांडेय का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पता लगाया जाएगा कि कॉम्पलेक्स की छत पर शनिवार को कौन-कौन मौजूद था। कॉम्पलेक्स के कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी।
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एक बार दुकान जल जाए तो उसका संसार ही उजड़ जाए

रविवार को आग में जले सामान को ढूढ़ते लोग - फोटो : amar ujala
‘साहब! एक बार जिसकी दुकान जल जाए, उसका तो संसार ही उजड़ जाता है। दर्जनों दुकानदार छोड़-छोड़कर भाग गए। कितने तो कर्ज में डूब चुके हैं। साहूकारों के डर से दर्जनों दुकानदार मार्केट छोड़कर भाग गये।’

यह दर्द अकेले राम बिहारी यादव का नहीं बल्कि वहां के लगभग 200 दुकानदारों का है। सोहन लाल ने बताया कि आग लगने के बाद सालभर का बजट बिगड़ जाता है।
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शासन-प्रशासन से भी नहीं मिली मदद

आग में दुकान जल जाने के बाद अफसोस करती एक महिला - फोटो : amar ujala
सब्जी विक्रेता विनोद यादव ने बताया कि मां सुनीता बीमार है। इलाज के लिए उसे 20 हजार रुपये का इंतजाम करना था। दवाइयों में रोज 100 रुपये से अधिक का खर्चा है। ऐसे में दुकान भी जल गई।

जिला प्रशासन के लोग भी नाम नोट करके ले गए लेकिन, अब तक मदद के लिए कोई नहीं आया। रविवार को खुद ही दुकानदार साफ सफाई में जूझते रहे।

राख के ढेर में तलाशते रहे सामान
पांच साल की मोनी, उसकी बड़ी बहन सोनी और मां सुनीता समेत पूरा परिवार राख के ढेर में बचा हुआ सामान तलाशता रहा। कुछ दिनों पहले ही सुनीता थोक में कपड़े लेकर आई थी।

उसने सोचा था कि होली में सारा माल बिक जाएगा लेकिन, बहुत माल बच गया। अब सब कुछ राख हो गया।
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